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Thursday, October 9, 2008

जो शराब नौ दिन खराब रहे वो दसवे दिन अच्‍छी कैसे हो जाती है

पेश है एक माइक्रो पोस्‍ट। नवरात्र खतम हुई और शराब पर लगी रोक भी।माता की भक्ति या भय से शराब से नौ दिनों तक तौबा करने वालो ने दसवें दिन फिर से मुंह से लगा लिया। बहाना रावण के वध को से‍लीब्रेट करने का है। अब जो शराब नौ दिनो तक खराब रही वो दसवें दिन अच्‍छी कैसे हो सकती है। इसी तरह मंगलवार, गुरूवार, शनिवार या फिर अपनी पंसद का कोई भी दिन भगवान के नाम पर समर्पित कर उस दिन शराब को छुना पाप समझने वालों के लिए बाकि के दिन शराब पुण्‍य कैसे हो जाती है। मेरी तो समझ में आजतक नहीं आया। आपको ये राज समझ में आया हो तो मुझे भी बता देना।

33 comments:

Udan Tashtari said...

क्या करियेगा साहब!!

विजय दशमी पर्व की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सब बहाने हैं दिल को बहलाने के ..और सेहत बिगाड़ने के
दशहरे की शुभकामनाएं

jitendra said...

दस सिर वाले रावण को देखने के नशा जरूरी है शायद इसलिए शराब अच्‍छी लग रही होगी

हरि जोशी said...

दिल को छू गई बात। अब शराब पीने वाले साथियों को साफगोई से इसका जबाव देना चाहिए।

Vivek Gupta said...

विजय दशमी पर्व की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

ताऊ रामपुरिया said...

अनिल जी दशहरे की हार्दिक बधाई ! असल में अच्छा बुरा कुछ नही ! पीने वालो तो बहाने चाहिए होते हैं ! गम होगा तो भी पीनी है और खुशी होगी तो भी पीना है ! अपन तो समीर जी की बात को मान लेते हैं ! इन पीने वालों को कौन रोक पायेगा ?

Gyandutt Pandey said...

शराब किसी तर्क पर नहीं चलती!

भूतनाथ said...

दशहरे की बधाई और शुभकामनाएं ! पीने वाले नही मानेगे तो ना पीने वाले क्यूँ माने ! सवाल पूछना बिल्कुल जरुरी है ! पर शायद जवाब नही आयेगा !

सतीश सक्सेना said...

साकी शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर ,
या वो जगह बता की जहाँ पर खुदा न हो

Shiv Kumar Mishra said...

शराब के पुरानेपन को बढ़ाने का तरीका है जी. सुनते हैं पुरानी शराब ज्यादा बढ़िया होती है. नौ दिन न पीने से पुरानेपन (और बढ़ियापन) में नौ दिन का इजाफा होता है.......:-)

विजयदशमी की शुभकामनाएं.

Ghost Buster said...

सच कहा. इंसान ख़ुद को ही भुलावे में रखकर जिंदगी जीता है.

विजयादशमी की शुभकामनाएं.

Arvind Mishra said...

लागी नाही छूटे रामा चाहे जिया जाए ! एक समस्या पर समाधान कोई नहीं !

ताऊ रामपुरिया said...

वाह भाई सक्सेना जी मजा आ गया ! अगर आप फ़िर से कभी इधर आओ तो और एक दो सुनाइये ! हम तो सुन सुन कर ही मस्त हो गए ! बाक़ी बात आपने बड़ी जोरदार कही ! अनिल भाई कुछ मुशायरे का इंतजाम karavaaiye आज तो ! :)सतीश भाई भी मूड में लग रहे हैं !

राज भाटिय़ा said...

अनिल जी मै तो पीता ही नही, ओर जब कभी मुड हो तो क्या सोम तो क्या मगल फ़िर मेरे लिये सब दिन एक समान ही होते है, जो भगवान को सच्चे मन से मानाता है उसे पता होना चाहिये कि दिनो के नाम तो हम ने अपनी सहुलियत के लिये रखे है, ओर फ़िर क्या मां सिर्फ़ नो दिन ही जागती है फ़िर आंखे बन्द कर लेती है हमारे गन्दे कामो को ना देख पाये....
मै तो इतना जानत हू सब लोग भगवान को भी टोपी पहना रहे है..
धन्यवाद
इस पावन त्योहार की आप को बधाई

Mahesh said...

yeh to haal waisa hi hai, sarkar banwati hai pilati hai aur kahti hai peena swasthya ke liye haanikaarak hai.Baapu ne to bahut kuch kaha tha ab hum use unke janmadin per bhi nahi nibha paa rahe hain

ambrish kumar said...

sharab ka din se kya sambandh pusadkar ji.yeh vah aabe hayat hai jiska na koi dharm hai na jati aur sathi,galib ke bad bachan ne jo likha hum uski photo copy vale hi vichar de sakte hai,maza aa gaya post psdh kar.

संजीव तिवारी said...

इस नैनों चिंतन के लिये आभार ।


विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनांयें

makrand said...

bas kuch nahi
shrab me burai he
drinks allowed he
regards

श्रीकांत पाराशर said...

Baat aapki so feesadi sahi hai magar hamare desh ka system hi aisa hai. Har aadmi agar yah saval hamare niti niyantaon se poochhane lage aur itni baar poochhe ki ve pareshan ho jayen to shayad kuchh uchit samadhan nikal jaye.

दीपक said...

नौ दिन मन ही मन पिया है आज मुह लगा लेंगे और क्या !!!

आपको और आपके परिवार को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामानायें

NIRBHAY said...

Saton deen bhagwan ke,
Kya mangal kya peer,
Jis deen soye der tak,
BHOOKHA rahe fakir.

Ab rahi Sharab Ki baat to....
Sharabee Bura ho Sakta hai par Sharab nahi.
All over the world from the oldest civilisation we have found so far , and if we talk from Mayan to Mohanjod don Harappa & till unexplored/unknown (to outer world) deep forest tribal culture it is there, Sharab is there. Particularly to say none of these civilisations had any inter or cross connections.
Sharab fir Kharab kaisi hui, isme insaan ne kya paya? aur kaise yeh aa jati hai? god ka existence bhi har sabhyata maanti hai to sharab ka bhi.
I think they found some medicinal characters in it, as the excess of medicine is bad likewise Sharab also.
Sharab se jyada uske nashe ki lat kharab hai. Fir nasha nahi dekhta ki yeh Sharab ka hai, Ganje ka hai, synthetic goliyon ka hai etc. easily available and legal Nasha yeh Sharab ki pehchan ban chuki hai.
Ab ya to hum kah sakten hai ki said person apne Ishta dev ki aradhana hosh me rah kar karna chahta hai ya kuchh alag.
Kuchh alag matlab ab duniya me logon ne jo ki is blog ke author saheb ki peeda hai, kya rasta apnaya hai bhai?
Sahin kahun ab logon ne Bhagwan ya uparwale ko ek Jamadar ke roop me sweekar karna shuru kar diya hai, Sal bhar Garib logon ka gaala kato, yehi nahi to din bhar, Aur chale aao apne Jamadar ke pas, subah, sham, salana woh apke pap ko dho dega, tumhare ko chamka dega, do agarbatti ek maala ya phool kuchh prasad itna hi to lagta hai, yeh Jamadar har jagah Nirakar aur Sakar roop me uplabdh hai, bomb fodo jehad ke nam se Ibadat karlo ho gayi aapki safai, deen bhar tarju se kantaa maro, jamakhori karo aur de do daan pachas hazar ek kisi bhi Samiti ko bhagwan ke nam par ho gayi safai, fir se purvavat usi kam ko karte raho.
Yeh padh kar aapko gussa aayega kaya bakta hai, fir mai yeh kahta hoon ki Sharab ko kyon kharab kaha? mujhe gussa aata hai, Are Sharabi to nashe me rahta hai par aap log to nashe me nahi rahte fir kyun bhagwan ko aisa roop de diya?

Lagta hai mera yeh comment disapprove ho jayega. Khair..

"LUTFE MAI TUJHSE KYA KAHUN AIYE JAHID,
HAAY KAMBAKHAT TUNE KABHI PEE HI NAHI."

90 ml alchohol daily is permitted for good health, doctors says. this alchohol should be genuine and natural.

प्रतीक माहेश्वरी said...

एक बात पक्की है, शराब पीने वाले इस पोस्ट को नहीं पढने वाले हैं..नशे में जो होंगे..
दशहरे की शुभकामनाएं||

डा. अमर कुमार said...

ऎसा है न, अनिल जी कि आपने देर से यह सवाल उठाया...
अब तो अगले नवरात्रि तक प्रतीक्षा करें, हमलोग स्वयं ही परख लेंगे ।मिल कर साथ बैठेंगे, असत्य पर सत्य की विजय को सेलेब्रेट करेंगे, फिर एक संशोधित पोस्ट लिखेंगे , ही ही ही.. !

अनूप शुक्ल said...

नौ दिन मुश्किल से मिली, मंहगी हो गयी होगी। दसवें दिन फ़िर सस्ती। रावण के जलवे हैं। पीकर ही मरा होगा!

विष्णु बैरागी said...

यह धर्म के नाम पर किए गए पाखण्‍ड के अतिरिक्‍त और कुछ भी नहीं है । धार्मिक होने की अपेक्षा धार्मिक दिख्‍ाना जिस समाज में अधिक महत्‍वपूर्ण हो वहां ऐसे ही पाखण्‍ड होते हैं । पीने वालों को तो बहाना चाहिए । ऐसे लोगों की वास्‍तविकता कुछ ऐसी होती है -
तौबा मेरी जाम-ए-शिकन, जाम-ए मेरी तौबा शिकन
सामने है ढेर, टूटे हुए पैमानों का

Suresh Chiplunkar said...

भाई, जो व्यक्ति लड़के की चाह में पत्नी का चार-चार बार अबॉर्शन करवा देता है, जब वह "कन्या-भोज" करवा सकता है, तो फ़िर ये अपराध तो बहुत ही छोटा है… :) पाखण्ड की जय हो…

seema gupta said...

शराब को छुना पाप समझने वालों के लिए बाकि के दिन शराब पुण्‍य कैसे हो जाती है। मेरी तो समझ में आजतक नहीं आया। आपको ये राज समझ में आया हो तो मुझे भी बता देना।

' ye sval aaj tk hum bhee nahee sm,ej paye, shayad iska koee jvab hai hee nahee, ager jvab hotta to un logon ke smej mey bhee aata jo sharab ke thaikon pr navratry ktem hote hee bheed lga jma ho jaten hain..'

regards

अजित वडनेरकर said...

मार्के की बात है साहब...चिन्तन चालू रहे.....
:)

vicharmanthan said...

सतो दिन भगवान् के का मंगर का पीर
जी दिन सोया देर तक भूखा रहे फ़कीर
AAPNE बिलकुल सही कहा की जो चीज एक दिन के लिए ख़राब है तो दुसरे दिन अछि kaiseहो सकती है जो खराब है तो वह खराब है ...उसी तरह हर दिन भगवान् का होता है ...

G M Rajesh said...

anil ji dusheharaa abhinandan

sirf sharaab hi nahi non veg bhi pratibandhit thaa

rakhshanda said...

इसे कभी सही नही कहा जासकता है, ग़लत है और हमेशा ग़लत रहेगी...दशहरा मुबारक

डॉ .अनुराग said...

चिंता न करे वो दिन दूर नही जब नवरात्रों के लिए अलग से शराब बना करेगी ----व्रत वाली शराब

COMMON MAN said...

nasha kharab hi hota hai, iske liye koi kutark theek nahi, maine bhi kabhi kabhi muh se laga leta tha, lekin maine kabhi bhi sharab ko pasand nahi kiya. aur yah baat bhi utni hi theek hai ki sab din ek saman hain,