Friday, November 13, 2009

पता है ये फ़यान मुम्बई क्यों नही आया?

एक माईक्रोपोस्ट पेश है।रात्रिकालीन सत्संग़ मे कल अचानक़ राजकुमार ने सवाल किया कि पता है फ़यान मुम्बई क्यों नही आया?अब इस सवाल का जवाब तो किसी के पास था ही नही तो उसे जवाब क्या देते?मैने कहा जाने दे यार दिमाग मत खा ये फ़यान का पर्सनल मामला है वो जाने उसका काम।गोपाल बोला हो सकता है उसे दुबाई जाने का खयाल आ गया हो और वो उधर निकल गया हो।डाक्टर भी आड़े तिरछे सवाल से खासा नाराज़ नज़र आया।उसने भी राजकुमार की खिंचाई की और कहा सवाल तो ऐसे कर रहा है जैसे फ़यान से इंटरव्यूह लेकर आ रहा है।अब सब राजकुमार पर भड़क गये तेरा येई लफ़ड़ा रहता है।जब देखो अंट शंट बात करता है।वो भी उख़ड़ गया और बोला जब तुम लोग मेरे से सवाल करते हो तब?मैं बोला चल तू जीता हम लोगों को नही पता फ़यान मुम्बई क्यों नही आया?अब तू ही बता दे भैया कि वो मुम्बई क्यों नही आया?सिंपल सा जवाब है,पता नही तुम लोग कैसे नही समझ पाये?बड़े इंटलैक्चुअल बने फ़िरते हो।हम लोग बोले अबे होशियारी मत दिखा जवाब दे।तो वो हंस कर बोला भाई फ़यान को मराठी नही आती है ना इसलिये वो वापस चला गया।उसको अबू आज़मी वाला लफ़ड़ा पता चल गया था।इतना सुनते ही सबका दिमाग खराब हो गया और सबके मुंह से एक साथ निकला साले!और तब तक़ राजकुमार की हंसी रफ़्तार पकड़ चुकी थी।हम लोगो के पास भी सिवाय खिसियानी हंसी हंसने के कोई चारा नही था।दोस्तों के बीच फ़ुरसत के पलो को हंसी-मज़ाक मे जीने के दौरानछुई ये हल्कि-फ़ुल्की चर्चा है।इसका मुम्बई विवाद या मनसे से कोई लेना-देना नही है और कोई भी विद्वान इसे मुझसे जोड़कर ना देखें।राजकुमार एक पीने से लेकर खाने मे पूरे ग्रूप मे एक नम्बर है और उसे गंभीर विषय सख्त नापसंद है।उसका कहना है कि बड़ी मुश्किल से मनुष्य योनी मिली है,इसका पूरा-पूरा उपभोग किया जाना चाहिये पता नही अगले जनम मे कीड़े बनते हैं या मकौड़े?इसी मानसिकता के तहत उसका सवाल था।

25 comments:

जी.के. अवधिया said...

"राजकुमार एक पीने से लेकर खाने मे पूरे ग्रूप मे एक नम्बर है और उसे गंभीर विषय सख्त नापसंद है।"

बिजनेस में न जाकर पत्रकारिता में आ गये यह क्या कम बड़ी उपलब्धि है? :-)

अंशुमाली रस्तोगी said...

हां, उनका उत्तर ठीक लगा।

ललित शर्मा said...

अनिल भाई ये एक माईक्रो पोस्ट क्यों है कई पोस्ट का मसाला, फ़यान मुंबई इसलिए नही आया, मराठी से ड़रता है लाला- ये लाजवाब है-हाहाहा

Pratik Maheshwari said...

sahi hai bahut..
aur haan antim baat zyada hi sahi hai..
ek to zindagi hai.. usmein bhi ro-dhokar nikal jaaein to fir laanat hai..
jiyo jee bhar ke.. hanste hanste..
rote hue aate hain sab..hansta hua jo jaega..wo mukaddar ka sikandar kahlaaega !!

shubhkaamnaaein..

अभिषेक ओझा said...

:)

खुशदीप सहगल said...

अनिल भाई,
फयान डर गया था, कहीं उसे भी कसाब की तरह पकड़ कर आर्थर रोड जेल में डाल दिया जाता तो...वैसे ये फयान म्यामांर (बर्मा) का शब्द है...

जय हिंद...

AlbelaKhatri.com said...

waah bhai saaheb !

maze kara diye.........

Mithilesh dubey said...

हा-हा बहुत खूब जवाब रहा।

pallavi trivedi said...

कल मेरे पास भी ठीक ऐसा ही एस एम् एस आया था....बढ़िया लगा!

cmpershad said...

मुम्बई तो अब करेला है
उस पर भी नीम चडेला है :)

पी.सी.गोदियाल said...

राज ठाकरे की भभकिया उसे पसंद आ गई, या फिर डर गया !

संजय बेंगाणी said...

अगली बार मराठी सीख कर आया तो? राज क्या करेगा? :)

योगेन्द्र मौदगिल said...

कमाल है दादा... ये राजकुमार को मनुष्य योनि मिली कैसे....? मिश्रा जी तो कहते हैं कि नर में होती ही नहीं...

SACCHAI said...

": maza aagaya sir ,aapka bhi jawab nahi ."

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ताऊ रामपुरिया said...

लाजवाब.:)

रामराम.

Vivek Rastogi said...

हा हा हमारे ऑफ़िसों की जल्दी छुट्टी कर दी गई, फ़ोन पर फ़ोन आने लगे कि घर पहुँचे कि नहीं, हम लगभग ४ बजे घर पहुँच गये और मौसम का आनंद लेकर पकौड़ों का आनन्द लिया। और इंतजार करने लगे फ़यान का पर हाय !!! वो तो बायपास करके निकल गया हम तो समझे थे कि पता नहीं आज कितने निपटने वाले हैं, पर वाकई ये तो फ़यान का निजी मामला है। :)

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

क्या मुम्बई जाने के लिये मराठी सिखना पडेगा

राज भाटिय़ा said...

वेसे कसाब भी मराठी कहां बोल सकता होगा, उसे इस गुंडे ने क्यो नही पकडा......

Udan Tashtari said...

नहीं जोड़ा मुंबई विवाद से इसे...:)

राजकुमार ग्वालानी said...

अनिल भईया ये राजकुमार कौन हैं? जरा खुलासा कर दें, कोई राजकुमार ग्वालानी समझ बैठा तो हम तो गए काम ले, लग जाएगी अपनी वाट। हमें तो न तो ज्यादा पीने का शौक है और न खाने। हम नंबर वन क्या इसमें नंबर 10 भी नहीं हैं।

Anil Pusadkar said...

राजकुमार तुम वो वाले कुमार नही हो।हम तुम्हे एन ओ सी दे रहे हैं और चाहो तो कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट भी दे देंगे।

ललित शर्मा said...

अनिल भैया ये राजकुमार(ग्वालानी) को पता नही था कि कल इसका भी नाम आपकी पोस्ट पर चस्पा होने वाला है,और आज वाट लगने का डर सता रहा है, जादु भी देखना चाहते है और डर भी लगता है। चलो आज तो आपने एन ओ सी दे दी लेकिन कल.....

Dr. Mahesh Sinha said...

सही कहा राजकुमार ने दो दिन की जिन्दगी हंस के जी लें

काजल कुमार Kajal Kumar said...

'फ़यान को मराठी नही आती है ना '
हा हा हा हा हा
मुझे और कुछ नहीं कहना है...मेरे आज के इंटरनेट कनेक्शन के पैसे वसूल हुए...

शरद कोकास said...

ओह तो यह राजकुमार ग्वालानी है मै सोनी समझ रहा था .. गलती हुई । सचमुच?