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Tuesday, January 19, 2010

लाख चाह कर भी मैं बात नही कर पा रहा हूं ब्लाग परिवार के सदस्यों से!

इतने सुविधाभोगी हो गये हम कि लगता है सुविधाओं के गुलाम हो गये हैं।अब देखिये ना मैं नये साल पर और उसके बाद मकर संक्रांति पर ब्लाग परिवार के अपने रिश्तेदारों से बात करना चाहता था मगर चाह कर भी नही कर पाया।इसमे समय जैसी बेशकीमती चीज़ की कमी आड़े नही आई,आड़े आई तो बस हमारी सुविधाओं पर निर्भर रहने की गुलामप्रवृत्ति।मैं बात कर रहा हूं संचार सुविधाओं की।टेलीफ़ोन के बाद आये मोबाईल फ़ोन ने हमे अपना इतना आदि बना दिया है कि ऐसा लगता है कि अब उसके बिना गुज़ारा मुश्किल हो गया है।

जीं हा मोबाईल के कारण ही मैं अपने ब्लागर रिश्तेदारों से बात नही कर पाया।मेरा मोबाईल खो गया और उसी के साथ-साथ पिछले दस-बार्ह सालों से इकट्ठा किये गये नम्बर भी।अब इसे मेरी अलाली कहिये या अज्ञान मैने कभी उन नम्बरों की सीडी बना कर सुरक्षित रखने के बारे मे सोचा तक़ नही।नतीज़ा अब पछतावे का होत है जब चोर ले गया मोबाईल।मैं आज-तक़ मोबाईल फ़ोन बदलने के साथ ही नम्बरों को उस्मे ट्रांसफ़र करवाता आ रहा हूं।फ़ोन विक्रेता जीतू(यंहा की जानी-मानी शाप तोहफ़ा का मालिक है वो) बार-बार कहता रहा कि सारे फ़ोन नम्बर कम्प्यूटर मे स्टोर कर ले पर यंहा तो आत्मविश्वास म्यूनिसीपाल्टी के बिना टोंटी वाले नल की तरह बह रहा था,सो उसकी बात नही मानी,और अब माथा पकड़ कर बैठें हैं।

जब दोस्तों को भी पता चला कि मेरा फ़ोन चोरी हो गया है तो उन्होने उस चोर को ढूंढ कर ईनाम देने का प्रस्ताव रख दिया।उन लोगों को कहना था कि राक्षस(यानी मैं)का फ़ोन चुराना बड़े कलेजे का काम है ऐसे बहादुर का सम्मान किया जाना चाहिये।खैर अब फ़ोन जा चुका है और उसके साथ ही सारे नम्बर भी।अब याद करो तो भी नम्बर याद नही आते और नम्बर बदलने वाले दोस्तों का नम्बर तो सोच भी नही सकते।1250 फ़ोन नम्बर थे उस फ़ोन में।डबल सीम का फ़ोन लेने के बाद उसमे एक फ़ोन पर बात करते समय दूसरे का एंगेज़ होना और उस पर आई काल को खूद काल करना अखरता था।फ़िर एक नम्बर जानने वाले को दूसरे नम्बर से लगाओ तो उसका जवाब होता था मैने तो आपको काल किया ही नही।फ़िर अपना नाम बताओ तो अरे हां भाईसाब या अरे हां सर या अबे तू से शुरू होता था बातचीत का सिलसिला।कई बार अन्जान नम्बर को देख कर उसे याद करने कोशिश और चिड़चिड़ाना,ये सब देख कर सब दोस्त यही सलाह देते थे कि डबल सीम वाले एक फ़ोन की बजाये दो अलग फ़ोन रखो तो झंझट से बचोगे।सही कहते थे वो और उनकी सलाह पर मैने एक नया फ़ोन लेकर दोनो फ़ोन अलग कर लिये थे।इस बार जीतू की दुकान मे भीड होने के कारण नम्बर बाद मे ट्रांसफ़र करा लूंगा सोच कर दूसरे फ़ोन मे नम्बर नही सेव करवा पाया था और दूसरा फ़ोन चोरी हो गया।
टेलीफ़ोन के ज़माने मे मुझे याद है सारे दोस्तो और रिश्तेदारों के अलावा भी मुझे सरकारी दफ़्तरों और नेताओं के नम्बर मुंह-जबानी याद थे।नम्बर याद रखना मेरा शौक था और मैं पाकेट टेलिफ़ोन डायरी तक़ नही रखता था।दोस्तों को या अख़बार के दफ़्तर मे भी किसी को नम्बर पूछना होता था सीधे मुझसे पूछ लेते थे।टेलिफ़ोन डाय्रेक्ट्री नही हूं बे कह कर मैं नम्बर बता कर खुश होता था।कहने का मतलब ये कि उस समय दिमाग पर भी ज़ोर दिया जाता था क्योंकि टेलिफ़ोन मे नम्बर सेव नही होते थे।लेकिन मोबाईल फ़ोन के आते ही नम्बर याद रखने की आदत छूटती चली गई और फ़ोन कान्टेक्ट मे असीमित नमब्र सेव करने की सुविधा भी मिलने लगी और नम्बर डाय्ल करने की खटखट से भी बचाव होने लगा।सो लोग मोबाईल पर निर्भर होने लगे और मैं भी।

अब फ़ोन चोरी होने के बाद हालत ये है कि रायपुर मे आयोजित ब्लागर मीट मे उपस्थित नही हो पाने की सूचना देने के लिये मुझे राजतंत्र वाले साथी ब्लागर राजकुमार ग्वालानी का नम्बर प्रेस क्लब के स्टाफ़ से लेना पड़ा।फ़िर पाब्ला जी से बात करने के लिये राजकुमार से उनका नम्बर लेना पड़ा।टंकी पर चढे अजय झा का नम्बर नही होने के कारण उनसे नीचे उतरने के लिये फ़ोन पर चर्चा नही कर पाया।ब्लागर भाई कुलवंत हैप्पी के एसएमएस को नम्बर फ़ीड़ नही होने के कारण पह्चान नही पाया और सुबह-सुबह उन्हे एसएमएस के नम्बर पर फ़ोन लगा कर उनकी नींद खराब कर दी।ऐसे बहुत से प्राब्लम रिश्तेदारों से बात करने मे भी आ रहे थे।उनके नम्बर तो मैने छोटे भाई से ले लिये पत्रकार साथियों के नम्बर प्रेस क्लब की डाय्रेक्टरी से ले लिये प्राब्लम आ रहा है तो बस अपने ब्लागर साथियों के नम्बर इक्ट्ठा करने में।सोचा सबसे अलग-अलग नम्बर मांगने से अच्छा है कि एक पोस्ट इस पर लिख मारूं और बात नही कर पाने का दर्द बयां करने के साथ ही उनसे उनके नम्बर भी मांग लूं।सो भाईयो और बहनो जिन्हे ऐसा लगता हि कि मुझे नम्बर दे देने चाहिये दे सकते हैं,चाहे कमेण्टस के जरिये या फ़िर मेल से।जो नम्बर दे उसका भला और जो ना दे उसका भी भला।

भूल सुधार आदरणीय खुशदीप जी ने इस बारे मे ध्यान दिलाई कि मैंने नम्बर तो मांगे लेकिन अपना नम्बर और ई-मेल एड्रेस नही दिया जिस पर नम्बर भेजा जा सके,सो भाई खुशदीप की आज्ञा का पालन करते हुये मैं अपने नम्बर दे रहा हुं।
09827138888 और 09425203182

ई-मेल एड्रेस है. मेरे खयाल से अब किसी को परेशानी नही होना चाहिये।वैसे सबसे पहले अनूप शुक्ल जी ने नम्बर भेज दिया और उन्ही से आदरणीय ज्ञान जी का नम्बर भी मिल गया।आदरणीय डा महेश सिन्हा भैया और खुशदीप का भी नम्बर मिल गया।जिन्होने दिया उनका भला और जो देने वाले हैं उनका भी और जो नही देंगे उनका भी।
anil.pusadkar@gmail.com

16 comments:

खुशदीप सहगल said...

अनिल भाई,
इस पोस्ट पर आप अपना ई-मेल अड्रैस और फोन नंबर भी दे देते तो सुविधा रहती...मेरा फोन नंबर है- 09873819075

जय हिंद...

संगीता पुरी said...

सचमुच मोबाइल के आने के बाद कोई नंबर याद नहीं रहता .. टेलीफोन के जमाने में हमें सारे नंबर याद होते थे .. इंटरनेट वाले दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों से फिर से संपर्क किया जा सकता है .. पर बाकी लोगों के नंबर डायरी में या सी डी में रखना चाहिए .. वैसे मोबाइल के सिम में रखे नंबर शायद सुरक्षित होते हैं !!

ललित शर्मा said...

अनिल भाई-चोर को सही मे पुरष्कृत करना चाहिए।
अगर मिल जाए तो, 26जनवरी को पुलिस ग्राउंड मे।:)

डॉ महेश सिन्हा said...

9893098332

डॉ महेश सिन्हा said...

कुछ ब्लॉगर जो माँगने पर भी नंबर या ईमेल आईडी न दे तो उनका क्या करें?
जो दे उसका भी भला जो न दे उसका भी

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

टेक्नोलोजी ने हमें गुलाम बना दिया है. सही कह रहे हैं आप.

ताऊ रामपुरिया said...

हमारे पास तो आपका नंबर है, हमारा नंबर आपको मिल गया होगा.

रामराम.

बालकृष्ण अय्य्रर said...

कोई बात नहीं चलो अब नये सिरे से नंबर इकटठा करें अय्यर - 09425552027

Yanesh Tyagi said...

गुलाम टेक्नोलोजी ने नहीं बनाया. अगर टेक्नोलोजी को ठीक तरह से इस्तेमाल किया जाये तो कोई समस्या नहीं है. अगर अनिल भाई अपने नम्बरों की सीडी बनवा लेते या फिर अपने मोबाईल को कम्पुटर से जोड़ कर नंबर कंप्यूटर में सेव कर लेते तो कोई समस्या नहीं थी.

अनिल भाई, मेरी सलाह है कि अब अपने नंबर कंप्यूटर में रखना शुरू कर दो. आप अपने नंबर इंटरनेट पे भी रख सकते है ताकि अगर कंप्यूटर खो जाये या ख़राब हो जाये तो आप इन्टरनेट से नंबर ले लें. इन्टरनेट पे नंबर रखने का सबसे आसान तरीका यह है कि गूगल डोक्स (docs (dot) google (dot) com) पे जाकर एक वर्कशीट बना लो और उसमे सब नंबर सेव कर लो.

अगर करो तो भला, न करो तो भी भला...

BrijmohanShrivastava said...

सर -त्योहार के अवसर पर आप तो बधाई देते ही है ।मेरे पास आपका 919630000800 नम्बर है उसकी जगह नया नम्बर नोट कर लिया है मेरा नम्बर तो आपके पास है ही

henry J said...

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मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

राज भाटिय़ा said...

अजी हम तो यहां है, लेकिन मै अपना फ़ोन ना० दे रहा हुं लेकिन यह पहली फ़रवरी को १२.०० बजे के बाद ही चलेगा, तभी आप से बात भी हो सकेगी, यह रहा +919992313988 ओर सात फ़रवरी तक चलेगा. राम राम जी की

राजीव तनेजा said...

ये मेरे नंबर हैं ...9810821361, 9213766753 और 9136159706

आपका नंबर मेरे पास है

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

chita not !
ham abhee bhejte hain sabhee ke nambar aur e-mail !









jo hamree phone book me hain !
jay ho!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

जीतू लोग एकदम सही कहते हैं, हमें सुनने व मानने की आदत भी डालनी चाहिये :)