Thursday, July 8, 2010

माता-पिता,पत्नी और बच्चों मे फ़र्क़!

एक बहुत छोटी सी पोस्ट जिसमे बहुत बड़ी बात छीपी हुई है।ये बात मेरा अपना अनुभव नही है मगर मुझे मिले इस एसएमएस ने मुझे भी सोचने पर मज़बूर कर दिया है।मुझे जो एसएमएस मिला उसके अनुसार दिन भर जी तोड़ मेहनत करके घर लौटने के बाद पिता का सवाल-कितना कमाया?पत्नी का सवाल-कितना बचाया?बच्चों का सवाल-क्या लाये?और मां का सवाल -बेटा कुछ खाया या नही?सच मां तो मां है,जय माता दी।

27 comments:

Udan Tashtari said...

माँ तो माँ ही होती है, उसका स्थान कोई नहीं ले सकता.

ali said...

संबंधों के बदलते स्वरूप पर अच्छा सन्देश !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

जय माता जी की!

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

कुपुत्रो जायेत, माता क्‍वचिदपि ............

सत्‍य मॉं मॉं है भईया.

seema gupta said...

सभी के सवाल अपनी जगह जायेज हैं, पर सच ही है माँ तो माँ ही है......
regards

आचार्य उदय said...

सुन्दर लेखन।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

वाकई में मां तो मां ही है

arvind said...

माँ तो माँ ही है......सुन्दर लेखन.

Voice Of The People said...

मां निस्वार्थ प्रेम की सबसे बेहतर मिसाल है. http://aqyouth.blogspot.com/2010/04/blog-post_4894.html

P.N. Subramanian said...

माँ के सामने तो हम नतमस्तक हैं. हमारी अर्धांगिनी को यही रास नहीं आता.

shikha varshney said...

तभी तो वो माँ है ..जिसका स्थान सर्वोपरि है .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यही होती हैं माँ की भावनाएं..रिश्तों के अनुसार प्रश्न भी बादल जाते हैं

S.M.HABIB said...

...माँ दा रिश्ता सब ते ऊंचा,
माँ है रब दा रूप.

AlbelaKhatri.com said...

gaagar

me

SAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAGAR

डॉ टी एस दराल said...

रिश्तों की सही पहचान दिखा दी ।
जय माता दी ।

राज भाटिय़ा said...

वाह जी बिलकुल सही कहा. धन्यवाद

प्रवीण पाण्डेय said...

सटीक अवलोकन ।

Sanjeet Tripathi said...

very true bhaiya, very true

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

'' बालक दुखी , दुखी महतारी ! '' ( कबीर )

डॉ महेश सिन्हा said...

सत्य वचन

नीरज जाट जी said...

मां तो मां है जी।

अन्तर सोहिल said...

दुनिया की एक ही कोर्ट है जहां हर गुनाह के बदले मिलती है माफी और शुभ दुआयें
जय माता दी

अनूप शुक्ल said...

सही ही है।

अनूप शुक्ल said...

गुरु-चेला युग्म को बधाई।

नियमित लिखने से अलग कैसे रहे इतने दिन भाई! लिखते रहना चाहिये। ब्लॉग जगत न लिखने से अच्छा हो जायेगा क्या?

खुश रहा जाये।

गुरु-चेला अपना गृह-लक्ष्य कब हासिल करेंगे।

Halke-Fulke said...

jaandar post..

हिमान्शु मोहन said...

माँ-बाप की याद आती है उस वक़्त ज़ेयादह
जब कोई नहीं पूछ्ता - "खाया? नहीं खाया?"
(नामालूम)
अच्छी पोस्ट हेतु आभार!

PD said...

आज भी पूछी थी.. और आज भी झूठ बोल दिया..