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Friday, May 20, 2011

कमाल है!कसाब को लाड-प्यार से पालते हैं और हर साल आतंकविरोधी दिवस भी मनाते हैं!

एक छोटी सी पोस्ट एक बड़ा सवाल लिये हुये।सच में ऐसा कमाल तो दुनिया में और कंही नही नज़र आता होगा।आतंकवादियों को सज़ा तक़ नही दे पाने वाले लोग हर साल आतंकवाद विरोधी शपथ लेते हैं।उस देश मे जिसने एक नही दो-दो प्रधानमंत्री खोये हैं और एक के  शहादत दिवस को ही आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाता है।अब बताईये सालों हो  गये अफ़ज़ल और अज़मल को जेल में ठाठ से रह्ते हुये मगर मजाल अहि कि देख में घुसकर आम आदमी से लेकर संसद में बैठे खास आदमी तक़ को निशाना बनाने वालों को और कितने साल तक़  पालेंगे पोसेंगे?क्या तब तक़,जब तक़ किसी मंत्री की बेटी को ले जाने वाले हवाई जहाज को हाईजैक ना कर लिया जाये।उसके बदले में अफ़ज़ल और अजमल को रिहा करने की शर्त ना सामने आ जाये?देश के नागरिकों को बचाने के बहाने मंत्री के रिश्तेदार को बचाया जा सके और हमारे सम्मानित अतिथियों को रिहा किया जा सके?फ़िर वे गोलियां चलायें,बम फ़ोड़ें,हमारे लोगों की जान लें और हम फ़िर से आतंकवाद से लड़ने की शपथ ले सकें?क्या फ़ायदा ऐसे ढकोसलों का,ऐसे चोचलो का,जब हम अपने ही देश मे रंगे गिरफ़्तार किये गये खूनी ह्त्यारे आतंकवादी को फ़ांसी पर नही लटका पाते  हों तो?जब हम अपने ही देश के एक राज्य में खून-खराबा करने वाले नक्सलियों की मदद करने के  लिये राष्ट्रद्रोह के आरोप मे गिरफ़्तार किये गये आरोपी को दोषमुक्त होने से पहले ही देश के योजना आयोग मे सदस्य मनोनित करते हो तो फ़िर आंतकवाद के विरोध में शपथ लेने का नाटक करने का भी हक़ नही है किसी को।

8 comments:

Arunesh c dave said...

क्या करे बेचारे जब मारने की सोचते हैं कोई न कोई चुनाव आ जाता है

imnb said...

ये भारत है यह नक्सलियो के लिए कड़ा कानून बन सकता है। लेकिन विदेशी आतंकवादिवायों के लिए नहीं शिव सेना सुप्रीमों बाला साहेब ठाकरे ने बहुत पहले ही कहा था कि नक्सलियो और तमिल टाइगर के शरीर में हिंदु खून हैं। जब हम कश्मीर में आतंक फैलाने वाले इस्लामिक आतंकवादियों से शांति की बात कर सकते हैं। तो इनसे क्यो नहीं लेकिन हमारे देश में परंपरा रही हैं। इसी परंपरा का नाम पाकिस्तान है। और अब कसाब अबजल गुरू है। जिन्हें सरकारी मेहमान बनाया गया है। भारत सरकार कठोर हो सकती है तो साध्वी प्रज्ञा ,स्वामी असीमानंद के लिए,विनायक सेन,असीतसेनगुप्ता के लिए बस्तर के आम आदिवासियों के लिए..........देश के किसान आंदोलनों के लिए

Gyandutt Pandey said...

सरकार विरोधाभासों पर जी रही है! :)

shubham news producer said...

Yehi Ho Raha Hai Bhaiya
Sarkar Yaha Atankwadiyo ko damand ki tarah Patle hai aur kathit naxliyo ke sath dene walo ko Uchach pado mein bithate hai

SG's Blog said...

जब हमारे देश मे गिरफ्तार किये गए आतंकवादियों और उग्रवादियों के खिलाफ मुक़द्द्मों का यह हाल है, तो निश्चित ही यह एक तरह से उन्हें बढ़ावा देने जैसा ही है.
हज़ारों अदालतों मे लाखों मुकद्दमे न जाने कितने वर्षों से लंबित पड़े हुए हैं. हर व्यक्ति इस बात से भली-भाँती परिचित है कि अगर कोई मुक़द्द्मा कोर्ट मे चला गया तो उसे १५-२० वर्ष लगना तो निश्चित ही है.
इस स्थिति का सबसे ज्यादा फायदा उठा रहे हैं हमारे भ्रष्टाचारी नेता, भू-माफिया, अपराधी, और आतंकवादी. क्योंकि इन्हें ये अच्छे से पता है कि जब तक मुक़द्द्मों के फैसले आयेंगे, तब तक वे निर्बाध रूप से भ्रष्टाचार, चोरी, डकैती, लूट, हत्याएं इत्यादि खुल के कर सकते हैं, और इसी बीच क़ानून की किसी खामी का फायदा उठा कर, गवाहों को या तो बहला कर या उन्हें धमका कर, येन-केन-प्रकारेन मुक़द्द्मे से बरी हो ही जायेंगे.
मेरा ये निश्चित तौर पैर मानना है कि अगर मुक़द्द्मों के निपटारे के लिए एक निश्चित अवधि तय कर दी जाये, तो ८५-९० प्रतिशत अपराध अपने आप ही कम हो जायेंगे.
लोगों मे, खास कर अपराधियों, भ्रष्ट नेताओं, भ्रष्ट अफसरों, भू-माफियाओं और आतंकवादियों मे त्वरित न्याय और अभेद तथा कठोर क़ानून लागू करके क़ानून का भय बिठाना नितांत आवश्यक है.

मनोज कुमार said...

बहुत ही विचारोत्तेजक बात कही है आपने।

प्रवीण पाण्डेय said...

यही हमारी विडम्बना है।

ललित शर्मा said...

Jagmohan ko pradhanmantri banate to itana kharch nahi hota.