Friday, July 22, 2011

ये किसने दुआ की थी बारिशों की!

भट्ठी से तप रहा शहर दोपहर को अचानक मीठी सी ठंडी लहर से झूमने लगा था।ऐसा लगा कि भगवान ने आसमान मे अपना एसी चालू कर दिया है।तभी दोपहर की चमकदार धूप पता नही क्यों शर्मा कर देहात की नई-नवेली दुल्हन की तरह अपने आप मे सिकुड़ने लगी और जनरल बोगी मे चिरौरी कर सीट के कोने मे बैठे बादल ने पसरना शुरू किया।थोड़ी ही देर मे आसमान पर उसका कब्जा था और मैं टाटा के शोरूम मे बैठा गाड़ी की ज़ल्दी डिलेवरी की दुआ करने लगा।मुझे आई(मां) के हाथ के बने प्याज के गर्मागर्म पकौड़े की याद सताने लगी थी।बरसात मे भीगने के बाद गरम पकौड़े खाने का मज़ा ही कुछ और होता है।

थोड़ी ही देर मे गाड़ी के मिलते ही लगा कि मौसम के साथ-साथ भगवान भी मेहरबान है।गाड़ी मे बैठ कर बाहर निकलते-निकलते बारिश की बूंदो ने गाड़ी की छत को म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट बना कर नया तराना छेड़ दिया था।उस अलौकिक संगीत मे डूबा हुआ मै कब घर पहुंचा पता ही नही लगा।गाड़ी से उतर कर सीधे अंदर भागा।आई ने पूछा आज इस समय्।मैने कहा कुछ नही थोड़ी देर मे भजिये बना कर खिलाओगी क्या?उन्होने कहा अभी बना देती हूं।मैने कहा नही अभी मे छत पर जा रहा हूं।बड़ा हो गया है बच्चा नही है तू…… मैने उनकी बात सुनने की बजाय छत की ओर भागना ज्यादा मुनासिब समझा।आई की आवाज़ मेरा पीछा करते हुये आई और कान मे फ़ुसफ़ुसा के कहा कि पता नही कब सुधरेगा।

तब-तक़ बारिश की बूंदों ने भी धीरे-धीरे मतदान की तरह रफ़्तार पकड़ ली थी।अब उनका संगीत किसी विदेशी संगीत की तरह न समझ मे आने वाला होकर भी कानो मे मिश्री घोल रहा था।बूंदो के बोल समझ मे नही आ रहे थे मगर वे पैरो को थिरकने पर मज़बूर कर रहे थे।सर से लेकर पैर तक़ बारिश की बूंदों के रंग मे रंगने के बाद होश ही नही रहा कि समय कैसे बादलो की तरह उडता चला जा रहा है।बूंदे भी लगता है कि थक़ गई थी और उसकी रफ़्तार दम तोड़ने लगी थी।रह-रह कर गरजने और चमक्ने वाली बिज़ली भी खामोश होकर कही छुप कर बैठ गई थी।

नीचे से आई की आवाज़ ने बारिश के संगीत का जादू तोड़ा।अरे भजिये लाऊं क्या?मै आ रहा हूं आई, कह कर मै नीचे उतरा।कपड़े बदले और गर्मा गरम भजिये की प्लेट और टमाटर और हरी मिर्च-धनिये की चटनी लेकर उपर आया।बालकनी मे बैठ कर फ़िर से ज़ोर मारती बारिश की बूंदो की छमाछम सुनते हुये भजिये का स्वाद लेने लगा।वाह क्या बात है?दुनिया मे इससे अच्छा भजिया और कोई बना ही नही सकता होगा,ऐसा मैने सोचा और अलौकिक संगीत के साथ स्वाद के समंदर मे गोते खाने लगा।

अचानक़ बिजली रानी ने फ़िर से अपनी ताक़त दिखाना शुरू कर दिया और थोड़ी ही देर मे वो छतीसगढ के उत्पाती हाथियो की तरह आऊट आफ़ कंट्रोल होने लगी।उसकी उद्दंडता को देख बरखा रानी भला कंहा चुप रहने वाली थी।उसने भी अनुशासनहीनता मे कोई कमी नही की और अब गुलज़ार के गीतों सी मधुर बरखा रानी रामसे ब्रदर्स की फ़िल्म सी लगने लगी।रह-रह कर कड़कड़ाकर चमकने वाली बिजली ऐसा लग रहा था टार्च जलाकर देख रही हो कि है कोई जो उसका मुक़ाबला करने बाहर निकले।

अरे अंदर आ जा,नीचे से आई की आवाज़ ने ध्यान बंटाया।मैने कहा आ रहा हूं।इतने मे फ़िर बिजली चमकी और ऐसा लगा कि सामने थोड़ी दूर कंही गिरी है।अरे उस तरफ़ तो झोपड़पट्टी है।ओफ़ बुरा हाल होगा वंहा तो।अभी तो शुरूआत है। बारिश जब जवान होगी तब तो और कहर बरपायेगी।अचानक़ मै कई साल पीछे चला गया।याद आ गया मुझे बारिश के मौसम का हाल बयान करना।तालाबों का ओव्हर-फ़्लो होना,नालियो-नालो का फ़ूट जानां। निचली बस्तियों मे पानी भर जाना।रात-रात भर जाग कर गुज़ारना। दूसरे अख़बार मे छपी, नवजात शिशु को छाती से लिपटाये मां की तस्वीर देख कर संपादक का बड़बड़ाना। और, थोड़ा और,थोड़ा और ह्यूमन स्टोरी लिखने के लिये कहना।रात भर टपकती छतों के पानी को गिनती के बरतनों मे जमा करके ऊलीचना। भूख से बिलखते बच्चो को, परेशान होकर चुप कराने की बजाये पीटना।झडी यानी लगातार होने वाली बारिश मे दूसरे और तीसरे दिन भी चुल्हा नही जला सकने की हताशा।रोज कमा कर खाने वालो के चेहरो पर गहराती निराशा।

ओफ़ मै ये क्या सोचने लगा। मैने सिर को ज़ोरदार झटका दिया और उन खयालो को बाहर निकाल फ़ेकने की भरपूर कोशिश की।पर वो खयाल तो न चाहते हुये भी युपीए की सरकार की तरह रिपीट होने लगे।भूख से बिलखते बच्चे।गीले कपडो मे तरबतर घरों मे भरे पानी को बाहर फ़ेंकते लोग्।बिमारियो का संक्रमण रोकने के लिये मुंह पर मास्क पहने दवा बांटती मेडिकल टीम्।फ़ोटोग्राफ़र और विडीयोग्राफ़रो की टीम के साथ प्रभावित ईलाको का दौरा करते जन?प्रतिनिधि। अख़बारो मे गरीबी को छापने की होड़।मै परेशान हो गया ये क्या हो गया है मुझे।मै तो सारे काम-धाम ड्राप करके मौसम का मज़ा लेने घर आया था।तभी नीचे से आई ने आवाज़ दी, भजिया और दूं क्या बेटा?नही आई,पता नही, ये नही, मेरे मुंह से कैसे निकला।मुझे याद आया। एक ऐसी ही तूफ़ानी बारिश की अपनी रिपोर्ट का शीर्षक्।"ये किसने दुआ की थी बारिशों की"।मैने कुर्सी से उठते हुये प्लेट मे बचे भजिये के आखिरी टुकड़े को मुंह मे ड़ाला।पता नही क्यों आज आई के हाथ के भजिये मे वो स्वाद में वो मज़ा नही आया.

9 comments:

Rahul Singh said...

शहरी बारिश का बढि़या चित्रण. किसान का मन तो झूम-झूम रहा है.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वर्षा ऋतु में बारिस न हो तो अटपटा तो लगता ही है!
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मगर ईश्वर कृपालू हुए
और आपका आलेख सार्थक हो गया!

Banti Nihal said...

आपने तो मेरी बस्ती की उन याद्दों को तजा कर दिया. वो रातों को बैठ कर पानी टपकने वाली जगह पर बाल्टी रखना तो कहीं मग रखना. आधी नीद पर रहकर, बस भगवन से दुआ करना की ये बरशात कब रुकेगी. थोड़ी ही देर में वो बस्ती में पानी का भर जाना. रात रात भर जागकर दोस्तों के साथ मिलकर लोगों की मदद करना. कभी किसी टीवी बहार निकलना तो कभी किसी का पलंग. कभी किसी बच्चे को निकलना तो कभी किसी बुजुर्ग को सहयता देना. एक अलग ही तरह का माहोल बन जाना. कभी भगवान को कोसना तो कभी प्राथना करना.
भला तो केंद्र की योजना का जिससे तेलीबांधा तलब सौन्दर्याकरण से बस्ती से उठाकर बोरिया कला फ्लैट में शिफ्ट कर दिया नहीं तो इस बार भी वही दिन देखने पड़ते.
आपने उन यादों को तजा कर दिया शुक्रिया. बहुत अच्छा लिखा है आपने, कृपया मेरे छोटे से ब्लॉग पर आकर मार्ग दर्शन दे ... http://bantinihal.blogspot.com/

प्रवीण पाण्डेय said...

बारिश में उन घटनाओं की बरसात न कराईये जिनको देखकर अँसुओं की बरसात हो चुकी है।

रेखा said...

नई गाड़ी की शुभकामनाये. बारिश का स्वागत तो शानदार होता है पर बारिश का मौसम चुनौती से भरा भी होता है.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

गरीब और बेघर के लिये तो कयामत ही है..

Madhur said...

बारिश में मन के भावों के साथ, यादों को मिलाकर खींचा गया बहुत बेहतरीन चित्रण ! मीठे , खट्टे अहसास ही तो ज़िन्दगी का ज़ायका है ! बहुत बढ़िया अनिल भैया ...

KSR Murty said...

Fantasti Bhaiyya If govt. awarding any contract to contractor then and there only our concerned department ministers takes 30% commission after this what contractor will do ? Contractors supply cheap quality materials and the result is infront of us.

KSR Murty said...

Before this also lot of scams in projects have been done by govt. In 2008 Govt. (Helath Department) has floated a tender for Cancer Machine in which SIEMENS and Varian have participated and in Price bid Siemens found L1 and according to the tender norms the govt. department suppose to place an order to siemens for Rs. 8 Crore but they have tried to place an order to Varian at Rs. 9 crore. when they Siemens and their dealer fighted for this then they have cancelled the tender and after this Siemens Has filed a writ pettition to Chief Justice High Court Bilaspur after filing this writ the Hon'ble court has given interim releif to Siemens and passed a stay order on particular cancer equipment after knowing all this facts the Health Department(Govt.) again floated a tender and this only Varian has participated the tender and on single bid the govt has placed an order to Varian for the supply of Cancer machine at Rs. 10 crores. The govt. has intentionally procured this equipment at extra cost of 2 crores .
17 minutes ago · Like
Ksr Murty After this Siemens has moved the writ for contempt of court as govt. overlooked and ignore the hon'ble High court's stay order and procured the equipment for the interest of BJP ministers and IAS officers of health department That time Mr. B.L.Agrawal was health secretary for the department against whome CBI has raided and found huge black money.
13 minutes ago · Like
Ksr Murty Its very unfortunate that even Hon'ble court also was unable to take decision on contempt of court writ against the govt. officials due to heavy pressure from BJP Govt. Any writ submitted in Hon'ble high court is for deciding the case not to give the dates to party. Its very shame on our LAW And order system as this particular writ decision was not made by our hon'ble High court till date ( it means 3 years back the writ was filed but till date the decision was not made . in this type Law and order system who will go to the court and what justice the people will expect ?
7 minutes ago · Like
Ksr Murty This BJP's national president demands the resignation of PM and our finance minister for the scam of 2 G spectrum . Its good step by the opposition party but what their (BJP) party is doing in their stated the same which congress is doing Corruption Corruption Corruption Corruption.......... All this blody politicians are the same and they are playing the game with the Indian public