Tuesday, July 26, 2011

ये काली सूची क्या है?गलती की है तो सीधे काल-कोठरी में डालो!काली सूची का चोचला क्यों?

छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर की सड़के बरसात की एक झड़ी भी नही झेल पाई और ऊखड़ गई।किसी डिटर्जेन्ट पाऊडर वाले को चाहिये यंहा आये और पाऊडर से सडक तक़ धुल जाने का विज्ञापन बना ले।महामहिम राष्ट्रपति के आगमन पर शहर की सड़कों का काया कल्प कराया था स्वागतोत्सुक नगर निगम ने।उसके करोड़ो रुपये की लागत वाले व्हाईट हाऊस के उद्घाटन के लिये बुलाया गया था उन्हे।उनके आगमन और उनके प्रवास तक़ तो सब ठीक ही रहा लेकिन जैसे ही सावन के बादलों ने झूम के बरसना शुरू किया सड़को पर का डामर धुल कर सड़क बनाने वालों के चेहरो पर पुतता चला गया।6 करोड़ रूपये से भी ज्यादा की रकम एक पानी में धारो-धार बह गई।       अब इस मामलें मे जब जनता चिल्लाने लगी तब इस मामले ने हमारी बिरादरी की भी नींद में खलल डाला और पब्लिक के इस हाट टापिक को कैश कराने की होड़ लग गई।हंगामा बढता देख नगर निगम ने भी तुरत-फ़ुरत एक अफ़सर को सस्पेंड कर दिया और सड़क बनाने वाले ठेकेदार को काली सूची में डालने की घोषणा कर जनता के असंतोष की चिंगारी पर धधकने से पहले ही खानापूर्ती का पानी डाल दिया।                                                               अब सवाल ये उठता है कि ये काली सूची है क्या?इसका उपयोग क्या इससे पहले नही किया गया?क्या काली सूची में डालने से बाकी ठेकेदारों ने घटिया निर्माण बंद कर दिया?क्या उस प्रयोग से व्यवस्था में कोई सुधार आया?क्या काली सूची में डालने के बाद उक्त ठेकेदार को काम मिलना बंद हो जाता है?क्या उसका काम करना रुक जाता है?क्या उसके रिश्तेदारों की दूसरे नामों से फ़र्म रजिस्टर्ड नही रहती?क्या काली सूची में डाल देना ही मात्र उसके किये कराये की सज़ा है?क्या करोड़ो रूपये की हरामखोरी करने के लिये काली सूची में डाल देना ही पर्याप्त है?                                                                                                                                                       काली सूची के नाम पर जनता को कब तक़ बेवकूफ़ बनाया जायेगा?ये सवाल भी महत्वपूर्ण है।आखिर एक अफ़सर का सस्पेंड हो जाना और कुछ समय बाद फ़िर बहाल हो जाना और सस्पेंशन-बहाली का अनवरत सिलसिला कब तक़ चलता रहेगा?क्या उस अधिकारी पर सरकारी राजस्व के नुकसान की ज़िम्मेदारी तय नही होनी चाहिये?क्या उसकी देख-रेख में बनी सड़क के बह जाने के लिये वो अकेला ठेकेदार ही ज़िम्मेदार है?क्या इस प्रकरण में उसकी मिलीभगत साबित नही होती?अगर नही होती तो फ़िर उसे सस्पेंड क्यों किया गया है?     बहुत हो चुका ये जांच,सस्पेंशन और काली सूची का खेल।सड़क बनाने के लिये टेण्डर नोटिस ज़ारी करने से पहले अपने लोगों को उसके लिये पात्र बनाने का खेल शुरु हो जाता है।शर्ते ठेकेदारों के हिसाब से बनती है।फ़िर सरकारी दर से कम दर पर ठेकेदार काम कैसे कर लेता है ये भी एक यक्ष प्रश्न है।सब कुछ पहले ही तय हो जाता है तो फ़िर दोषी एक-दो लोग ही क्यों?उन्हे कौआ बनाकर टांगने से क्या बाकी परिंदे सुधर जायेगे?बहुत हो चुकी ये नौटंकी अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे काली सूची में नही काल-कोठरी में डालना चाहिये।इससे कम कुछ भी नही चलेगा।वरना हर साल सड़क बनेगी-बहेगी,फ़िर बनेगी-फ़िर बहेगी,फ़िर बनेगी और फ़िर बह जायेगी,और बहती ही रहेगी,सड़क भी और भ्रष्टाचार की धारा भी।

14 comments:

Arunesh c dave said...

धूल खाऒ प्यास बुझाओ फ़िर भाजपा जिंदाबाद के नारे लगाओ राजधानी मे ये हाल है तो गांवो मे क्या हो रहा होगा

बी एस पाबला said...

काली सूची का मतलब उस सूची वालों को दिए जाने वाले अभयदान का आम लोगों को ना दिखाना

और सस्पेंड होना मतलब बंदा 'कुछ' करने की 'हिम्मत' रखता है यह खास लोगों को बताना

जिम्मेदारी तय होना भी सार्वजनिक थोड़े ही होगा :-)

Gyandutt Pandey said...

काली सूची, कमेटी बिठाना, ग्रुप ऑफ मिनिस्टर (GOM) बनाना - ये सब कुछ न करने के या ठण्डे बस्ते में डालने के औजार हैं!

DUSK-DRIZZLE said...

yAHA SAB KALA HAI..... HAM BHI TO KALA- PILA HI KARTE RAHATE HAI
SANJAY VARMA

प्रवीण पाण्डेय said...

काल कोठरी में डाल दिया जाये।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

खाली सूची होगी!

Khare A said...

ye suspension kya hota he!
ye kali soochi kya hoit he!

seedha chaurahe par ulta latka dena chahiye! aur janta se appeal ki jani chahiye ki bhigo bhigo ke maro! bas agar ye kanoon pass ho jaye! fir kisi anna ko "jantar-mantar" aur kisi bawa ko "rammila maidaan " me dharna dene ki jarurat nhi hogi!
sari vyavastha apne aap durust ho jayegi!

sallon kannon to laao! kyun lokpal-bill par hungama kar rahe ho! yah kafi he!

3 lakh caror ke 11 hazar karor hi reh gaye! kuch dino ke bad ye bhi nhi milenege! hamare dwara di gayi takat ka galat istemaal na karo!

vijay said...

bilkul theek.har shakh pe ullooo baithe hai.

Vaneet Nagpal said...

Anil Pusadkar Ji,
नमस्कार,
आपके ब्लॉग को "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगपोस्ट डाट काम"के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

Anil Pusadkar said...

thx vaneet ji.

झुनमुन गुप्ता said...

सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे, इस मुहावरे को संशोधित करके सांप भी न मरे लाठी भी न टूटे बनाना पडेगा।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') said...

अनिल जी,

आरज़ू चाँद सी निखर जाए,
जिंदगी रौशनी से भर जाए,
बारिशें हों वहाँ पे खुशियों की,
जिस तरफ आपकी नज़र जाए।
जन्‍मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
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ब्‍लॉगसमीक्षा की 27वीं कड़ी!
क्‍या भारतीयों तक पहुँचेगी यह नई चेतना ?

Madhur said...

गलत व्यवस्था के खिलाफ उठाया गया यह स्पष्ट स्वर है . लोग सोचते बहुत हैं , स्पष्ट मत के साथ लिखना बहुत दमदारी का काम है. बधाई और धन्यवाद, अनिल भैया

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

bade bhai, kya ek hi aadmi jimmedar hai iska? jab tender huye honge, jab commission tay hua hoga, jab hissa sab ke paas pahuncha hoga. ye thekedar bhi kisi n kisi neta ya afsar ka aadmi hoga, kisi ko aise hi contract mil jata hai kya..
har jagah achchhe bure log maujood hain, lekin bure log achchhon par haavi hain... isse jyada kya likha jaaye jab bhrashtachar ko khatm karne ke sthan par aawaj uthaane wale ko hi jail me daalne ki taiyari ki jaati hai..