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Friday, October 7, 2011

चार गुना पावरफ़ुल हो गया है रावण,जभी तो एक बार में नही,चार बार में मार पाये उसे मुख्यमत्री,वो भी राज्यपाल के फ़ुल सपोर्ट के साथ।

यंहा छत्तीसगढ में रावण जी बहुत पावरफ़ुल हो गये हैं।पहले से चार गुना।जी हां मैं सच कह रहा हूं।जभी तो कल दशहरा मैदान में रावण जी एक बार में जले ही नही।जले क्या नही रामजी का तीर उन तक़ पहुंचा ही नही।दूसरे तीर का भी यही हाल हुआ और तीसरा पहुंचा जरूर और कुछ हिस्सों को जलाया भी मगर वो भी फ़ेल ही रहा।यंहा के रावण को जला भी कौन रहा था,स्वयं मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी उनके साथ थे।इसके बाद भी रावण का तीन अटेम्प्ट मे बाल भी बांका ना हुआ।रावण तो रावण, कुंभकरण और मेघनाथ भी मज़े से खड़े रहे।मुख्यमंत्री रमनसिंह ने तीनो को न्क्सलवाद,भ्रष्टाचार और महंगाई बताया था।यानी छत्तीसगढ में नक्सलवाद,भ्रष्टाचार और महंगाई चार गुना बढ गई है,ताक़तवर हो गई है,और तीनो एक एक बार मे नही दो बार में नही तीन बार में नही चार बार में मरेंगे।यानी चार गुना ताक़त और लगाना होगा यंहा की सरकार को।और उसके बाद भी बाहरी मदद के बिना नही जलने वाला रावण।यंहा कल जब तीन प्रयास में नही जला तो रावण के पुतले को पैरो पर पेट्रोल डाल कर जलाया गया।अब बताईये यंहा का रावण मुख्यमंत्री के तीन तीन अटेम्प्ट को असफ़ल कर दे रहा है,वो भी तब जब यंहा राज्यपाल भी उनके साथ है।नरेन्द्र मोदी या येदुरप्पा जैसा प्राब्लम भी नही है।इससे तो यही लगता है कि नक्सलवाद,भ्रष्टाचार और महंगाई से निपटने के लिये इस सरकार को अपने प्रयास चार गुना और बढाने होंगे या अपनी ताक़त चार गुना बढानी होंगी और उसके साथ ही बाहरी सपोर्ट (पेट्रोल की तरह)लेना ही पड़ेगा,चाहे कांग्रेस का कह लिजीये या यूपीए का या फ़िर केन्द्र सरकार का।मैं तो बस ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहा हूं कि कम से कम अगली बार तो रावण को इतना पावरफ़ुल मत बना देना कि उसे जलाने के लिये चार चार बार तीर चलाना पड़ा।वो एक ही बार मे मर जाये तो बेहतर वर्ना जिस तरह से रावण की हाईट बढ रही थी लोगों को अंदाज़ा ही नही हुआ कि साथ-साथ उसकी ताक़त भी बढ रही है।भगवान मदद करना वरना पड़ेगा ,हे राम।

6 comments:

DUSK-DRIZZLE said...

BHAIYA RAVAN KE SAMANE RAM BANANE VALE KAMJOR KAYO PAR RAHE HAI JARA YAH BHI BATAYE.
SANJAY VARMA

Ritu said...

समझ में नहीं आता है कि जलने वाला रावण है या जलाने वाला :)

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत कठिन है डगर पनघट की।

Atul Shrivastava said...

रावणों का जमाना है और फिर राम कहां है... जो रावण मर जाए... हर साल सिर्फ पुतलों को जलाकर खुश हो रहे हैं हम और अब तो पुतले भी जलने में आनाकानी कर रहे हैं.... सच में कलयुग है...

Suman said...

nice

जी.के. अवधिया said...

रावण भी समझने लगा है कि राम के अग्निबाण से जलने में मुझे सम्मान मिलता है फिर मैं किसी अन्य के हाथों क्यों जलूँ? आखिर रावण का भी तो 'ईगो' है!