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Saturday, December 3, 2011

एफडीआई कंही टू जी पार्ट टू तो नही?फिर तो तिहाड भी कम पड जायेगी.

एफडीआई पर सरकार जिस तरह से अडी हुई है,उससे तो लगता है कि दाल में काला नही पूरी की पूरी दाल ही काली है.कंही ये टू जी पार्ट टू तो नही साबित होने जा रहा है़.ये मेरी आशंका है इसे लागू करने की सरकारी ज़िद को देखते हुए.ईश्वर करे ऎसा ना हो वर्ना इस बार तो तिहाड भी कम ही पडेगी.

3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

पूरी दाल काली है!

Atul Shrivastava said...

आगे आगे देखिए होता है क्‍या...???

Rahul Singh said...

बड़ा जोर-शोर है एफडीआई का, उसका असर जिन तक दस-पांच साल बाद पहुंचता, वे भी उत्‍सुक हो गए हैं वालमार्ट के लिए.
- एक देहाती बुजुर्ग की राय.