Thursday, July 4, 2013

सिर्फ वोटों के लिये देश को दांव पर मत लगाईये सरकार,देश को अलाली के भंवरजाल में मत झोंकिये

हैरान हूं मै सरकार का गरीबों की भूख मिटाने की भूख देख कर.सरकार अपने कार्यकाल के खत्म होने पर अचानक जागी है और गरीबों को भोजन की गारंटी देने पर तुल गई है.खैर आखिरी समय की बात करना गलत है,बेचारो को फुरसत ही नही मिली घोटाला करने और घोटालो का बिखरा मैला साफ करने से.तब सिर्फ और सिर्फ धनकुबेरों को खज़ाने की गारंटी देने पर तुली हुई थी सरकार.तब गरीबो का ख्याल नही आया.जब चलाचली की बेला आई तो गरीब याद आ गये.और कर भी क्या रही है सरकार गरीबों को रोजगार के जरिये अनाज नही दे रही है,उन्हे करीब करीब मुफ्त में अनाज देकर अलाली का धीमा जहर देकर अपने लिये वोट देने वाली मशीनों में बदलने की कोशिश कर रही है.वैसे ही मज़दूर मिलना मुश्किल हो रहा है,इस योजना के बाद तो बिल्कुल ही नही मिलेंगे.भोजन की गारंटी देना अच्छी बात है पर उन गरीबो की इतनी ही चिंता थी तो सरकार बनाते ही पहला काम यही करना था.एक ओर घाटा बढ रहा है कहकर किसानो की खाद,आम आदमी की रसोई गैस,पेट्रोल और डीज़ल पर से सबसीडी खत्म कर रहे हो.ठीक है मध्यम वर्ग आपका वोट बैंक नही रहा,इसलिये उन पर भार डाल रहे है पर गरीबो का वोट बैंक बनाने के चक्कर में किस पर भार डाल रहे हो.देश पर?ये गरीबों का भला है अपनी पार्टी का भला?सिर्फ वोटों के लिये देश को दांव पर मत लगाईये सरकार.और अगर इस योजना को लागू करना इतना ज्यादा जरुरी है तो पहले इस बात को मानिये की आज तक आपकी सारी योजनाऎ फेल रही है!आज तक आप गरीबो को भोजन तक मुहैया कराने में असफल रहे है?देश को अलाली के भंवरजाल में मत झोंकिये साब,अनाज दिजिये मगर कुछ् काम तो लिजीये उनसे.

3 comments:

पूरण खण्डेलवाल said...

सरकार मुर्ख बना रही है !!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

It is much easier to dole out fish than to teach angling...

प्रवीण पाण्डेय said...

अब सबको खाने की आदत डालनी होगी।