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Tuesday, February 2, 2010

अब पता चल रहा है कि ब्लागर दो प्रकार के होते हैं,उन्हे ढोया जा सकता है और उन्हे दिखा कर बल-प्रदर्शन भी किया जा सकता है।

ब्लागर मीट के रोचक अनुभव:मुझे तो अब तक़ पता ही नही था कि नेताओं की तरह ब्लागर भी दो प्रकार के होते हैं।एक जबर्दस्त और दूसरा जबरदस्ती।इतना जबरदस्त ज्ञान हमको मिला रायपुर ब्लागर मीट के बाद समुद्र मंथन टाईप विचार मंथन से।मैं तो खुद को भाग्यशाली समझ रहा हूं जो मीट मे चला गया वर्ना ऐसे महान विचारक और जबरदस्त ब्लागर से पता नही कब और कैसे मुलाकात हो पाती।

वैसे उन जबर्दस्त ब्लागर भाई के बारे मे किसी को कुछ बताने का इरादा न था और ना है।वे खुद ही अपने बारे मे बता चुके हैं और हो सकता है फ़िर बता दें आखिर वे ठहरे जबरदस्त ब्लागर।हम लोग तो लगता है उनकी परिभाषा के अनुसार दूसरी केटेगरी मे आते हैं यानी जबरदस्ती ब्लागर।ये क्लासीफ़िकेशन तो समझ मे आ गया गुरूजी मगर ये बात समझ मे नही आई कि जबरदस्ती ब्लागर अपना लिखा दूसरों को जबरदस्ती कैसे पढा सकता है?बस इतनी सी शंका है अगर इसका निवारण हो जाये तो हम जबरद्स्ती ब्लागर उन उपायों पर चलकर लोगों को जबरिया पढवा-पढवा कर हो सकता है एकाध दिन जबरदस्त ब्लागरत्व को प्राप्त कर सकें।

एक निवेदन है गुरुजी जो कुछ बतायें सारी दुनिया को अपने ब्लाग पर बतायें तो अच्छा लगेगा।वरना पिछली सारी बातें आपने साथी ब्लागर के ब्लाग पर कमेण्ट के रूप मे बताई थी जो मुझे लगा कि सबको पता चलना चाहिये इसलिये मुझे गड़े हुये मुर्दे उखाड़ना पड़ रहा है।वैसे एक बात मुझ नासमझ जबरदस्ती ब्लागर को और समझ मे नही आई कि आखिर आपको कौन सा ब्लागर ढोकर लाया गया दिखा।मेरे खयाल से वंहा जितने भी जबरदस्त और आपके हिसाब से ज्यादातर जबरदस्ती ब्लागर आये थे सब अपना बोझ खुद ढोने मे सक्षम थे।कौन ऐसा था जो बोझा था और किसे किसने ढोकर लाया ये भी थोड़ा स्पष्ट हो जाता तो बड़ी कृपा हो जाती,मेरा भी ज्ञान बढ जाता।

हां एक बात और आपने बताया है कि आपको वंहा भीड़ चुनावी रैली की तरह नज़र आई।भई हम तो समझ नही पाये कि चुनावी रैली की ज़रूरत किसे है और चुनाव होने कंहा है।हम तो शुरू मे कम उपस्थिती देख कर निराश हो गये थे और सारे अतिथी ब्लागरों से सम्पर्क कर उनके आने के बारे मे पता लगाने के लिय साथियों से कहते रहे।जब सबके आने का पता चला तब जाकर मन शांत हुआ।इसी कारण कार्यक्रम निर्धारित समय से आधा घण्टा देर से शुरू हुआ।अब आप ही बताईये जबरदस्त भैया कि जंहा लोगों के आने का इंतज़ार किया जा रहा हो वंहा चुनावी रैली जैसी भीड़ आपको कंहा से नज़र आ गई।मैं आपकी इस दूसरी(पहली कल बता चुका हूं)मनुष्यों मे नही पाई जाने वाली इंद्रिय का कायल हो गया हूं।

एक बात और किनके ब्लाग नही थे जिन्हे ब्लागर बताया गया ज़रा इस राज पर से भी पर्दा उठा देते तो हृदय गार्डन-गार्डन हो जाता और फ़िर उसकी घास पर बैठ कर चना खा लेते।मेरे खयाल से जितने लोग आये थे सभी ब्लागर थे और सबको बोलने का मौका भी दिया गया।किसी जबरदस्त ब्लागर को बोलने जबरद्स्ती रोका नही गया और ना ही किसी जबरदस्ती ब्लागर को जबरदस्ती बोलने के लिये कहा गया।आपको समोसे मे धन्ना सेठ के रूपयों की बू या बदबू जो भी आ रही थी आप उसी समय कहते तो बहुत अच्छा लगता।आप वंही पर बताते कि आपके अलावा और कौन-कौन जबरद्स्त ब्लागर है तो बहुत से लोग अपनी-अपनी पोस्ट पर आपके यशगान मे रहमान को बीट कर चुके होते।किसे ढोकर लाया गया है ये बता देते तो आपको हाथों-हाथ उठाया लिया जाता।मगर मुझे मालूम है आपको ज्यादा प्रशंसा प्यारी नही है।खैर जाने दीजिये आपको न सही,मुझे नही सही,जबरदस्त को न सही,जबरद्स्ती को न सही बाकी लोगों को तो बहुत से काम है।बाकी फ़ुरसत मिलने पर फ़िर लिखेंगे।तब तक़ के लिये सभी असली ब्लागर भाईयों को इस जबरदस्ती ब्लागर का नमस्कार।पढना और जबरद्स्ती कमेण्ट भी करना।हा हा हा हा हा।


अब पता चल रहा है कि ब्लागर दो प्रकार के होते हैं,जबरदस्त और जबरदस्ती!ब्लागरों को ढोया जा सकता है और उन्हे दिखा कर बल प्रदर्शन किया जा सकता है!