शादी के लिये कुछ दोस्त फ़ार्मेलिटी के लिये कभी-कभार फ़ोर्स करते है मगर कुछ दोस्त हमेशा ही शादी करने की बजाय मुझे खुशनसीब होने की गलतफ़हमी बनाये रखने मे मदद करते आये हैं।ऐसे ही एक दोस्त ने मुझे एसएमएस के जरिये बताया कि शादीशुदा का दर्द्।
उसने बताया कि दिन भर मेहनत कर रात को थक-हार कर घर लौटने के बाद पति से पत्नी पूछती है खाना खाकर आये हो खाओगे?नही खाकर नही आया हूं!तो क्या खाओगे?क्या खिलाओगी?जो आप कहे वो बना दूं।इतना प्यार भरा जवाब सुनकर कोई भी शादी-शुदा खुशी से ही मर जाये मगर आप आगे का भी किस्सा पूरा सुन लिजिये।बिना पूरा किस्सा जाने किसी भी निष्कर्ष पर पंहुचना सरासर गलत होगा।
तो,जो आप कहे बना दूं के बाद पति का डायलाग खिचड़ी ही खिला दो।अरे कल ही तो खाई थी खिचड़ी!तो दाल-चावल खिला दो।बच्चे नही खाते दाल-चावल!तो कोई सब्ज़ी बना दो।अब रात को कौन सब्ज़ी काटेगा।तो फ़िर कीमा बना लो।मुझे एलर्जी है।तो पराठें सेक दो।रात को कोई पराठे खाता है।तो कढी बना दो।दही नही है।अच्छा ऐसा करो अण्डे बना दो।पागल हो क्या?आज गुरुवार है?तो फ़िर क्या बनाओगी?अरे कैसी बातें करते हैं आप?आप जो कहो वो बनाकर खिला दूंगी! सुरेन्द्र छाबड़ा ने ये एसएमएस मुझे भेजा है।शायद वो ये बताना चाहता है कि मैं उन लोगों से ज्यादा खुशनसीब हूं।थोड़ा-थोड़ा तो मुझे भी लगता है कि वो सच कह रहा है,आप लोगों को क्या लगता है बताइयेगा ज़रूर्।
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Friday, August 27, 2010
Friday, April 23, 2010
शादी-शुदा नही होने का असली नुकसान आज समझ में आया.
शादी-शुदा नही होने का असली नुकसान आज समझ में आया.लम्बा-चौडा नुकसान झेलने के बाद ये पता चला कि इसका कोई विकल्प भी नही है.छोट-मोटा नही ज्वेलरी सेट का नुकसान हो गया मेरा.सच कह रहा हूं.आई शप्पथ.मतलब मां-कसम झूठ नही बोल रहा हूं.
हुआ यूं कि दोपहर को फ़ोन की घंटी बजी.नम्बर जाना-पहचाना नही था मगर उठाने पर उधर से जो आवाज़ आई उसे सुनकर दिल की घंटी बज गई.४५ डिग्री से पार कर चुके पसीने-पसीने चिपचिपे मौसम मे भी कंही कोने मे दबी-पडी रोमेंटिक भावनाओं ने अंगडाई भी ले ली और ना चाहकर भी हमने फ़ोन पर चेहरा नज़र नही आता है जानकर भी भरपूर मुस्कुराह्ट बिखेरते हुये हैलो कह दिया.
पर ये क्या?दूसरे ही पल सारे अरमानो ने परवान चढने के पहले ही दम तोड दिया.उधर से मिश्री सी आवाज़ वाली बोली सर मैं फ़लानी कंपनी से बोल रही हूं.मेरा स्वर भी कडवा यानी ओरिजनल हो गया.मैने भी कहा बोलिये.उसने बताया कि मेरा नम्बर लकी है और उस पर ज्वेलरी सेट व टूर का इनाम निकला है.अब तक मैं सब कुछ समझ गया था और इसलिये फ़िर से हंस कर पूछा तो .उसने कहा सर शाम को आप-दोनो को फ़लानी होटल मे आना होगा इनाम लेने.मैने फ़िर पूछा दोनो कौन?उसने कहा सर आप और मैडम?मैडम,मैने कहा मैडम तो नही है.वो अकबका गई.उसने कहा सर इनाम के लिये शर्त है पति-पत्नी को साथ मे आना होगा.मैने कहा वही तो बता रहा हूं,मेरी तो शादी ही नही हुई है,मैं बीबी कंहा से लाऊं.वो बोली फ़िर सर.मैने कहा मैं क्या बताऊं,तू बता?अब वो खिलाखिलाकर हंसी और उसने मिश्री की पूरी बोरी अपने मूंह मे घोल कर सारी सर.और मैं पहली बार सोचने पर मज़बूर हो गया कि शादी-शुदा नही होने से नुकसान भी हो सकता है?हा हा हा.वैसे ये कहानी-किस्सा नही है सच है.
Friday, April 9, 2010
सभी शादी-शुदा भाईयों और बहनों से क्षमा सहित एक सवाल।विवाह और मताधिकार की उम्र में अंतर क्यों?
फ़िर एक छोटी सी पोस्ट पूरि तरह निर्मल आनंद के लिये।कल मैने सवाल उठाया था विवाह के समय पत्नी दायीं ओर पति बायीं ओर क्यों बैठते हैं?बहुत पसंद किया आप लोगों ने उसे और कुछ भाईयों-बहनों और ताऊ जी ने तो मुझे भी लपेट दिया था उस सवाल में।तो भाईयों और बहनों कल की बात अधूरी रह गई थी।जब बल्लू उर्फ़ बलबीर के पहले एसएमएस का सवाल खुद उसी को देना पड़ा तो उसने दूसरा सवाल किया।विवाह और मताधिकार की उम्र में अंतर क्यों?मताधिकार की उम्र 18 और विवाह के लिये 21 वर्ष क्यों निर्धारित की गई है?अब सरदार का सवाल था सो सभी दोस्तों ने ज्यादा स्सर खपाने की बजाये कहा तू ही बता बे सरदार आज तो तू इंटैलिज़ेंटेस्ट बन कर आया है।उसके चेहरे पर तैर आई मुस्कान के सामने मोनालिज़ा की मुस्कान फ़ेल थी।वो बोला इसका मतलब ये है कि सरकार भी मानती है अट्ठारह साल मे आदमी देश तो संभाल सकता है बीबी नही।इस जवाब के बाद सबके सब उठे और कहा ये तो तेरी खोपड़ी की उपज हो नही सकती,है ना।उसने बड़ी मासूमियत से कहा हां।ये भी किसी का एसएमएस होगा,है ना?हां।तो साले उसका नाम तो बता जो तुझे ये एसएमएस कर रहा है और तू आके हमारा दिमाग खा जाता है।और फ़िर जो हंसी का फ़ौवारा फ़ूटा कि थमने का नाम नही लिया।आप भी सिर्फ़ हंसिये और खासकर शादी-शुदा भाईयों और बहनों से निवेदन है कि इसे शुद्ध हास्य के रूप में ले।मेरी मंशा शादीशुदा लोगों से कुंवारों को देश संभालने के मामले मे ज्यादा योग्य साबित करने की नही हैं।हा हा हा।मैं तो नही चाहता मगर अब आप लोग ही बताईये सरकार ऐसा करके क्या साबित करना चाह्ती है?
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