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Friday, August 27, 2010

क्या खाओगे?क्या खिलाओगी?जो आप कहें वो बना दूं!

शादी के लिये कुछ दोस्त फ़ार्मेलिटी के लिये कभी-कभार फ़ोर्स करते है मगर कुछ दोस्त हमेशा ही शादी करने की बजाय मुझे  खुशनसीब होने की गलतफ़हमी बनाये रखने मे मदद करते आये हैं।ऐसे ही एक दोस्त ने मुझे एसएमएस के जरिये बताया कि शादीशुदा का दर्द्।

उसने बताया कि दिन भर मेहनत कर रात को थक-हार कर घर लौटने के बाद पति से पत्नी पूछती है खाना खाकर आये हो खाओगे?नही खाकर नही आया हूं!तो क्या खाओगे?क्या खिलाओगी?जो आप कहे वो बना दूं।इतना प्यार भरा जवाब सुनकर कोई भी शादी-शुदा खुशी से ही मर जाये मगर आप आगे का भी किस्सा पूरा सुन लिजिये।बिना पूरा किस्सा जाने किसी भी निष्कर्ष पर पंहुचना सरासर गलत होगा।

तो,जो आप कहे बना दूं के बाद पति का डायलाग  खिचड़ी  ही खिला दो।अरे कल ही तो खाई थी खिचड़ी!तो दाल-चावल खिला दो।बच्चे नही खाते दाल-चावल!तो कोई सब्ज़ी बना दो।अब रात को कौन सब्ज़ी काटेगा।तो फ़िर कीमा बना लो।मुझे एलर्जी है।तो पराठें सेक दो।रात को कोई पराठे खाता है।तो कढी बना दो।दही नही है।अच्छा ऐसा करो अण्डे बना दो।पागल हो क्या?आज गुरुवार है?तो फ़िर क्या बनाओगी?अरे कैसी बातें करते हैं आप?आप जो कहो वो बनाकर खिला दूंगी! सुरेन्द्र छाबड़ा ने ये एसएमएस मुझे भेजा है।शायद वो ये बताना चाहता है कि मैं उन लोगों से ज्यादा खुशनसीब हूं।थोड़ा-थोड़ा तो मुझे भी लगता है कि वो सच कह रहा है,आप लोगों को क्या लगता है बताइयेगा ज़रूर्।

Friday, April 9, 2010

सभी शादी-शुदा भाईयों और बहनों से क्षमा सहित एक सवाल।विवाह और मताधिकार की उम्र में अंतर क्यों?

फ़िर एक छोटी सी पोस्ट पूरि तरह निर्मल आनंद के लिये।कल मैने सवाल उठाया था विवाह के समय पत्नी दायीं ओर पति बायीं ओर क्यों बैठते हैं?बहुत पसंद किया आप लोगों ने उसे और कुछ भाईयों-बहनों और ताऊ जी ने तो मुझे भी लपेट दिया था उस सवाल में।तो भाईयों और बहनों कल की बात अधूरी रह गई थी।जब बल्लू उर्फ़ बलबीर के पहले एसएमएस का सवाल खुद उसी को देना पड़ा तो उसने दूसरा सवाल किया।विवाह और मताधिकार की उम्र में अंतर क्यों?मताधिकार की उम्र 18 और विवाह के लिये 21 वर्ष क्यों निर्धारित की गई है?अब सरदार का सवाल था सो सभी दोस्तों ने ज्यादा स्सर खपाने की बजाये कहा तू ही बता बे सरदार आज तो तू इंटैलिज़ेंटेस्ट बन कर आया है।उसके चेहरे पर तैर आई मुस्कान के सामने मोनालिज़ा की मुस्कान फ़ेल थी।वो बोला इसका मतलब ये है कि सरकार भी मानती है अट्ठारह साल मे आदमी देश तो संभाल सकता है बीबी नही।इस जवाब के बाद सबके सब उठे और कहा ये तो तेरी खोपड़ी की उपज हो नही सकती,है ना।उसने बड़ी मासूमियत से कहा हां।ये भी किसी का एसएमएस होगा,है ना?हां।तो साले उसका नाम तो बता जो तुझे ये एसएमएस कर रहा है और तू आके हमारा दिमाग खा जाता है।और फ़िर जो हंसी का फ़ौवारा फ़ूटा कि थमने का नाम नही लिया।आप भी सिर्फ़ हंसिये और खासकर शादी-शुदा भाईयों और बहनों से निवेदन है कि इसे शुद्ध हास्य के रूप में ले।मेरी मंशा शादीशुदा लोगों से कुंवारों को देश संभालने के मामले मे ज्यादा योग्य साबित करने की नही हैं।हा हा हा।मैं तो नही चाहता मगर अब आप लोग ही बताईये सरकार ऐसा करके क्या साबित करना चाह्ती है?

Thursday, April 8, 2010

विवाह के समय पत्नी बायीं तरफ़ और पति दायीं तरफ़ क्यों बैठते हैं?

आज छोटी सी पोस्ट।हल्कि-फ़ुल्की,निर्मल आनंद के लिये।सभी से निवेदन है कि इसे उसी रूप मे ले।एक सवाल उठाया गया था दोस्तों के सत्संग में।सवाल ऐसा था जिससे मेरा दूर-दूर तक़ कोई वास्ता नही था,लेकिन बाकी सब उस सवाल से परिचित थे।काफ़ी देर तक़ जब सवाल का जवाब सामने नही आ पाया तो पूछने वाले भाई बलबीर ने ही जवाब भी दे दिया।सबने उसको अकल आने की बधाई दी तो उसने सरदार से असरदार होने का राज़ भी बता दिया।सवाल ये था कि विवाह के समय पत्नी बायीं तरफ़ और पति दायीं तरफ़ क्यों बैठते हैं?अब जवाब भी सुन लिजिये क्योंकि बैलेंस शीट के अनुसार तमाम असेटस दायीं तरफ़ और लायबिलिटीज़ बायीं तरफ़ होती है।अब सरदार के असरदार हो जाने का राज़ भी अरे भाई मुझे किसी ने एसएमएस भेजा था वही तुम लोगों को बता रहा हूं,और उसी बात को मैं आप लोगों को बता रहा हूं।आप लोग भी बताईयेगा सही क्या है गलत क्या है?क्योंकि अपुन तो आज तक़ बैलेंस शीट पर आया ही नही।

Monday, May 25, 2009

देश का भविष्य रो रहा था,सरकार सो रही थी और जनता की किसी को फ़िक़्र नही थी!

पेश है एक सेमी माईक्रो पोस्ट।रात की मण्डली मे जनता और सरकार की भूमिका पर चल रही चर्चा के दौरान एक बड़े अफ़सर ने इस की व्याख्या करते हुये जब कहा कि जब देश का भविष्य रो रहा था तो सरकार सो रही थी और जनता की किसी को फ़िक्र तक़ नही,तो सब चौंक गये।उन्होने कहा कि ये मै नही कह रहा हूं मेरे एक मित्र ने मुझे जो एसएमएस किया था,वो बता रहा हूं।उन्होने बताया कि एसएमएस मे कहा गया है कि एक बच्चा अपने पिता से पूछता है कि लोकतंत्र क्या है?पिता उसे बताता है कि आप जनता हो।मैं कमा कर लाता हूं,सो मैं कर्मचारी हूं।मम्मी घर चलाती है इसलिये मम्मी सरकार है और घर के सारे काम बाई करती है, सो वो मज़दूर है। छोटू देश का भविष्य है और हम सब मिलकर जनता और देश के भविष्य का खयाल रखते हैं।इस पर बच्चा कहता है कि मगर पापा कल जब देश का भविष्य रो रहा था तब सरकार सो रही थी।कर्मचारी मज़दूर को चूस रहा था और जनता की तो किसी को फ़िक़्र ही नही थी!बात मज़ाक मे निकली थी लेकिन थी बड़ी गंभीर्।कभी-कभी एसएमएस के ज़रिये मज़ाक मज़ाक मे कड़ुवा सच सामने आ जाता है।मुझे लगा इसे आप लोगो से शेयर करना चाहिये और मैने इसे पोस्ट कर दिया।