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Wednesday, September 12, 2012

बापू!कमीनो ने चौक चौराहे पर आपको होर्डिंग्ज़ की तरह लटका दिया है.

बापू का बड्डे करीब आ गया है.फिर से बापू को याद करने का कम्पीटिशन शुरु हो जायेगा.लेकिन बस एक दिन के लिये.मैं भी उनमे शामिल हूं मगर मैं एक दिन से कुछ ज्यादा दिनो तक़ उन्हे याद करता हूं.उन पर हमेशा कुछ न कुछ लिखता भी रहता हूं और उनकी जयंति के समारोह पर जमकर डायलागबाज़ी भी करता हूं.फिर इस बार उनके हैप्पी बड्डे को करीब आता देख सोच रहा हूं इस हाट केक को क्यों ना मैं भी काट कर एकाध पीस चख लूं.यानी कि एक कि
ताब उनपर उनके जन्म दिन के अवसर पर प्रकाशित करवा कर बहती गंगा में से टीआरपी के पांच दस बैरल भर ही लूं.मटेरियल तैयार है.शीर्षक भी बडा ही धांसू टाईप का सूझा है."बापू!कमीनो ने आपको चौक चौराहों पर होर्डिंग्ज़ की तरह लटका दिया है".कैसे रहेगा भाईयो?बताईयेगा ज़रा.वैसे किताब के कुछ अंश इस प्रकार है."""बापू कल आपका हैप्‍पी बड्डे है। इसलिए आज आपको नहला-धुलाकर कल के लिए तैयार किया जा रहा है। आप सोचते होंगे कि आपको देश के लोग कितना प्‍यार करते हैं, कितना सम्‍मान करते हैं, जो चौक-चौराहों पर आपको बिठाकर रखा है। बापू आपको गलत फहमी है। इन कमीनों ने आपको अपनी विचारधारा बेचने के लिए और नेतागिरी की दुकान चलाने के लिए होर्डिंग की तरह इस्‍तेमाल किया है। आप नेताओं के लिए मॉडल से ज्‍यादा कुछ नहीं हैं। सॉरी बापू आपको ये खरी-खरी खराब लग रही होगी, लेकिन क्‍या करूँ मजबूरी में आपको बता रहा हूं।
""""""तो बापू सबसे पहले आप ईश्वर अल्लाह तेरो नाम का ही हाल जान लो। आप चिल्लाते रह गये और भगवान आपकी बात मान कर सबको सन्मति देने को तैयार भी हो गया मगर सन्मति किसी ने नही ली।सबने अपने-अपने हिसाब से ईश्वर-अल्लाह को बांट लियां केवल ईश्वर अल्लाह को बांटा बल्कि उनके नाम पर देश को भी अघोषित रूप से बांट दिया।और तो और जुम्मे-जुम्मे आठ दिन हुये पैदा हुये ब्लाग को वंहा भी बंटवारा हो गया ईश्वर-अल्लाह के नाम पर ।ये तू क्या कह रहा है?बापू ने मुझसे पूछा।सच कह रहा हूं।बड़ा शौक था ना सच सुनने का तो लो सुनो।
खुब् भजन करते थे ना,क्या सोचा था,सब समझ जायेंगे?अरे बापू ये कुत्ते की दुम है जिसे अंग्रेज़ सीधा नही कर पाये वो भला भजन से…।खैर छोडो बापू।पहले ईश्वर अल्लाह के नाम पर लफ़ड़े मेरठ,कानपुर,लखनऊ,भिवंडी,हैदराबाद तक ही सीमित थे,मगर अब तो आपके स्टेट का अहमदाबाद भी इसमे शामिल हो गया है।इंदौर,मऊ,मालेगांव,मुम्बई और कई नये शहर टाप पर चल रहे हैं।कश्मीर का तो हाल ही मत पूछो।वंहा की हरी वादियों को लाल कर दिया गया है।इतना खून बह रहा है वंहा की चौक लाल हो गये हैं तो सड़क भी लाल है।चारो ओर खून ही खून है बापू,लाल ही लाल्।
"""""बापू खराब लग रहा है ना देश की हालत जान कर।आपके समय ज़रूर ये भूखे-नंगों का देश रहा होगा आज तो ये खूनियों-दंगों का देश हो गया है।चलिये छोडिये खून-खराबे को और क्या बताऊं?आपका दलित प्रेम बापू आजकल हाई-प्रोफ़ाईल ड्रामे मे बदल चुका है।जिन्हे आप हरि का जन कहते थे ना अब कहोगे तो बुक हो जाओगे।उन्के लिये अब आपकी ज़रूरत नही है।
"""""बापू आपका कोई बेटा इस देश का प्रधानमंत्री बना?बापू ने कहा मैने इसलिये………ये डायलागबाजी नही बापू,मैने उनकी बात बीच मे ही काट के कहा।आप तो सिर्फ़ ये बताओ कि क्या आपका कोई बेटा प्रधानमंत्री बना?नही।आपके बेटों मे से किसी का बेटा महामंत्री बना?नही।आप प्रधानमंत्री बने?नही।तो फ़िर आप ही बताओ आप असली कैसे हो सकते हैं।असली तो वो लोग हैं।पहले अम्मा जी बनी,फ़िर भैया जी बने और आप देख लेना कुछ ही दिनो की बात है बाबा भी बन जायेंगे। आखिर इस देश की जनता मूर्ख तो है नही।एकाध बार धोका हो सकता है,मगर तीसरी पीढी तक़्………।
तो कैसा रहेगा किताब का प्रकाशन,सभी चाहने वालो से उनकी बेशकिमती राय जानना चाहता हूं.

Sunday, October 3, 2010

सारी बापू ! आज फ़िर मैं सच नही बोल सका!

बापू!यानी हमे खुली हवा मे सांस लेना का अधिकार दिलाने वाला लंगोटीधारी महात्मा1बापू यानी अंग्रेज़ो के ज़ुल्मो सितम से मुक्ति दिलाने वाला अहिंसा का पुजारी,जिसका धर्म सच बोलना था।उसी बापू के हैप्पी बड्डे पर आज मुझे एक नही तीन-तीन कार्यक्रमों मे जाने का मौका मिला मगर अफ़सोस के उनमे से एक मे भी मैं सच नही बोल पाया।एक जगह ज़रूर मैंने कोशिश की मगर वंहा भी आधा सच बोल कर माफ़ी मांग ली और फ़िर कभी जब बापू पर बोलने लायक हो जाऊंगा,तब सब सच सच कहूंगा कह कर बला टाल दी।

आई एम सारी बापू!रियली आई एम सारी!मुझे तो तो पता भी नही चलता कि सच की महिमा क्या है!अगर मुझे आपका बड्डे सेलिब्रेट करके घर लौटते समय देर रात नही हो जाती।देर रात नेशनल वालों ने चाहे फ़ार्मेलिटी ही क्यों ना हो आपकी याद में मुन्ना भाई कि फ़िल्म दिखाई।उस फ़िल्म में कभी अवैध बंदूक और हथियार रखने के आरोप में टाडा  मे टाडा में बंद हुये मुन्ना भाई यानी संजय दत्त को सच बोलते देखा तो मुझे अपने आप पर बहुत शर्म आई।

टाडा का आरोपी सच बोल रहा था और मुझे आज आपके बड्डे पर एक नही तीन तीन बार सच बोलने का मौका मिला और मैं सच बोलने की हिम्मत नही कर सका।सच मे बापू,आज मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा अहंकार,मेरा अतिआत्मविश्वास सब चूर-चूर हो गया है।एक छोटा सा सच बोलना कितनी हिम्मत का काम है ये मुझे आज पता चला।सुबह सांभ्रांत और खूब खाये-पीये-अगाहे लोगों के फ़ेवरेट टाईमपास यानी सोशल सर्विस यानी क्लब कल्चर के एक कार्यक्रम में मुझे बुलाया गया था।मुख्य अतिथि थी महापौर डा किरणमयी नायक और अध्यक्ष था मैं।
महापौर ने राज्य भर से आये बच्चों और उनके अभिभावकों को बापू के बड्डे की बधाई दी और मैंने भी लगभग वही कुछ कहा।मैने बेशर्मी से फ़ोटो खिंचा कर नुमाईश करने वालों की फ़र्ज़ी सेवा को असली समाज सेवा का फ़र्ज़ी सर्टिफ़िकेट दे दिया।वंहा मैं चाह कर भी अपने दिल की भडास नही निकाल पाया क्योंकि वंहा मौजूद अधिकांश समाजसेवी मेरे मित्र थे।

उसके बाद प्रेस क्लब मे बच्चों के लिये चित्रकला स्पर्धा मे भी लगभग यही हालत रही मेरी।वंहा से मैं स्व गुलाब भाई दवे के चित्र पर माला अर्पित कर व दीप प्रज्ज्वलित कर खिसक लिया और वंहा से खादी ग्रामोद्योग व ग्राम सेवा समिति के कार्यक्रम मे बाल आश्रम पंहुचा।रोज़-रोज़ कुर्ता-पायजामा पहने कर सादगी का ढिंढोरा पीटने वाला मैं पता नही कैसे आज शर्ट-पैंट पहन कर कार्यक्रम मे पहुंच गया था।

बाल-आश्रम के बच्चों के सामने मुझसे झूट बोला नही गया,मगर फ़िर भी मैं सच बोलने की हिम्मत भी नही कर सका।वंहा भी मैने ये कह कर बला टाल दी कि अभी मैं बापू पर कुछ भी बोलने लायक नही हूं लेकिन जब भी मैं बापू पर बोलने लायक होऊंगा तब ज़रूर बोलूंगा।पता नही बापू आप पर मैं कभी कुछ बोल पाऊंगा भी या नही?मगर एक बात समझ में नही आई बापू झूठ बोलना पाप है,ज़रूरत से ज्यादा जमा करना पाप है इन बातो का सरासर मज़ाक उड़ाने वाले कैसे आपके मामले मे सरासर झूट बोल जाते है?बापू चाहे कोई कुछ भी कहे मुझसे तो आपके माम्ले में झूट भी नही बोला जाता,सच बोलना तो और दूर की बात है।

सारी बापू पिछले साल मैंने सोचा था कि झूट नही बोलूंगा,सच बोलूंगा मगर दो अक्टूबर को आपके बड्डे पर लोगों द्वारा दिलाये गये संकल्प शायद तीन तारीख आते आते चूर चूर हो जाते हैं।हो सकता है किसी और के साथ नही होता हो पर मेरे साथ तो होता आया है और शायद बापू के अगले बड्डे पर भी मैं सच ना बोल पाऊं।सारी बापू इस बार मैं सच बोल रहा हूं।हो सके तो मुझे माफ़ कर देना।आपको भी यदी लगे सच बोलना आसान है तो मुझे बताईगे ज़रूर।