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Sunday, October 3, 2010

सारी बापू ! आज फ़िर मैं सच नही बोल सका!

बापू!यानी हमे खुली हवा मे सांस लेना का अधिकार दिलाने वाला लंगोटीधारी महात्मा1बापू यानी अंग्रेज़ो के ज़ुल्मो सितम से मुक्ति दिलाने वाला अहिंसा का पुजारी,जिसका धर्म सच बोलना था।उसी बापू के हैप्पी बड्डे पर आज मुझे एक नही तीन-तीन कार्यक्रमों मे जाने का मौका मिला मगर अफ़सोस के उनमे से एक मे भी मैं सच नही बोल पाया।एक जगह ज़रूर मैंने कोशिश की मगर वंहा भी आधा सच बोल कर माफ़ी मांग ली और फ़िर कभी जब बापू पर बोलने लायक हो जाऊंगा,तब सब सच सच कहूंगा कह कर बला टाल दी।

आई एम सारी बापू!रियली आई एम सारी!मुझे तो तो पता भी नही चलता कि सच की महिमा क्या है!अगर मुझे आपका बड्डे सेलिब्रेट करके घर लौटते समय देर रात नही हो जाती।देर रात नेशनल वालों ने चाहे फ़ार्मेलिटी ही क्यों ना हो आपकी याद में मुन्ना भाई कि फ़िल्म दिखाई।उस फ़िल्म में कभी अवैध बंदूक और हथियार रखने के आरोप में टाडा  मे टाडा में बंद हुये मुन्ना भाई यानी संजय दत्त को सच बोलते देखा तो मुझे अपने आप पर बहुत शर्म आई।

टाडा का आरोपी सच बोल रहा था और मुझे आज आपके बड्डे पर एक नही तीन तीन बार सच बोलने का मौका मिला और मैं सच बोलने की हिम्मत नही कर सका।सच मे बापू,आज मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा अहंकार,मेरा अतिआत्मविश्वास सब चूर-चूर हो गया है।एक छोटा सा सच बोलना कितनी हिम्मत का काम है ये मुझे आज पता चला।सुबह सांभ्रांत और खूब खाये-पीये-अगाहे लोगों के फ़ेवरेट टाईमपास यानी सोशल सर्विस यानी क्लब कल्चर के एक कार्यक्रम में मुझे बुलाया गया था।मुख्य अतिथि थी महापौर डा किरणमयी नायक और अध्यक्ष था मैं।
महापौर ने राज्य भर से आये बच्चों और उनके अभिभावकों को बापू के बड्डे की बधाई दी और मैंने भी लगभग वही कुछ कहा।मैने बेशर्मी से फ़ोटो खिंचा कर नुमाईश करने वालों की फ़र्ज़ी सेवा को असली समाज सेवा का फ़र्ज़ी सर्टिफ़िकेट दे दिया।वंहा मैं चाह कर भी अपने दिल की भडास नही निकाल पाया क्योंकि वंहा मौजूद अधिकांश समाजसेवी मेरे मित्र थे।

उसके बाद प्रेस क्लब मे बच्चों के लिये चित्रकला स्पर्धा मे भी लगभग यही हालत रही मेरी।वंहा से मैं स्व गुलाब भाई दवे के चित्र पर माला अर्पित कर व दीप प्रज्ज्वलित कर खिसक लिया और वंहा से खादी ग्रामोद्योग व ग्राम सेवा समिति के कार्यक्रम मे बाल आश्रम पंहुचा।रोज़-रोज़ कुर्ता-पायजामा पहने कर सादगी का ढिंढोरा पीटने वाला मैं पता नही कैसे आज शर्ट-पैंट पहन कर कार्यक्रम मे पहुंच गया था।

बाल-आश्रम के बच्चों के सामने मुझसे झूट बोला नही गया,मगर फ़िर भी मैं सच बोलने की हिम्मत भी नही कर सका।वंहा भी मैने ये कह कर बला टाल दी कि अभी मैं बापू पर कुछ भी बोलने लायक नही हूं लेकिन जब भी मैं बापू पर बोलने लायक होऊंगा तब ज़रूर बोलूंगा।पता नही बापू आप पर मैं कभी कुछ बोल पाऊंगा भी या नही?मगर एक बात समझ में नही आई बापू झूठ बोलना पाप है,ज़रूरत से ज्यादा जमा करना पाप है इन बातो का सरासर मज़ाक उड़ाने वाले कैसे आपके मामले मे सरासर झूट बोल जाते है?बापू चाहे कोई कुछ भी कहे मुझसे तो आपके माम्ले में झूट भी नही बोला जाता,सच बोलना तो और दूर की बात है।

सारी बापू पिछले साल मैंने सोचा था कि झूट नही बोलूंगा,सच बोलूंगा मगर दो अक्टूबर को आपके बड्डे पर लोगों द्वारा दिलाये गये संकल्प शायद तीन तारीख आते आते चूर चूर हो जाते हैं।हो सकता है किसी और के साथ नही होता हो पर मेरे साथ तो होता आया है और शायद बापू के अगले बड्डे पर भी मैं सच ना बोल पाऊं।सारी बापू इस बार मैं सच बोल रहा हूं।हो सके तो मुझे माफ़ कर देना।आपको भी यदी लगे सच बोलना आसान है तो मुझे बताईगे ज़रूर।