बापू!यानी हमे खुली हवा मे सांस लेना का अधिकार दिलाने वाला लंगोटीधारी महात्मा1बापू यानी अंग्रेज़ो के ज़ुल्मो सितम से मुक्ति दिलाने वाला अहिंसा का पुजारी,जिसका धर्म सच बोलना था।उसी बापू के हैप्पी बड्डे पर आज मुझे एक नही तीन-तीन कार्यक्रमों मे जाने का मौका मिला मगर अफ़सोस के उनमे से एक मे भी मैं सच नही बोल पाया।एक जगह ज़रूर मैंने कोशिश की मगर वंहा भी आधा सच बोल कर माफ़ी मांग ली और फ़िर कभी जब बापू पर बोलने लायक हो जाऊंगा,तब सब सच सच कहूंगा कह कर बला टाल दी।
आई एम सारी बापू!रियली आई एम सारी!मुझे तो तो पता भी नही चलता कि सच की महिमा क्या है!अगर मुझे आपका बड्डे सेलिब्रेट करके घर लौटते समय देर रात नही हो जाती।देर रात नेशनल वालों ने चाहे फ़ार्मेलिटी ही क्यों ना हो आपकी याद में मुन्ना भाई कि फ़िल्म दिखाई।उस फ़िल्म में कभी अवैध बंदूक और हथियार रखने के आरोप में टाडा मे टाडा में बंद हुये मुन्ना भाई यानी संजय दत्त को सच बोलते देखा तो मुझे अपने आप पर बहुत शर्म आई।
टाडा का आरोपी सच बोल रहा था और मुझे आज आपके बड्डे पर एक नही तीन तीन बार सच बोलने का मौका मिला और मैं सच बोलने की हिम्मत नही कर सका।सच मे बापू,आज मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा अहंकार,मेरा अतिआत्मविश्वास सब चूर-चूर हो गया है।एक छोटा सा सच बोलना कितनी हिम्मत का काम है ये मुझे आज पता चला।सुबह सांभ्रांत और खूब खाये-पीये-अगाहे लोगों के फ़ेवरेट टाईमपास यानी सोशल सर्विस यानी क्लब कल्चर के एक कार्यक्रम में मुझे बुलाया गया था।मुख्य अतिथि थी महापौर डा किरणमयी नायक और अध्यक्ष था मैं।
महापौर ने राज्य भर से आये बच्चों और उनके अभिभावकों को बापू के बड्डे की बधाई दी और मैंने भी लगभग वही कुछ कहा।मैने बेशर्मी से फ़ोटो खिंचा कर नुमाईश करने वालों की फ़र्ज़ी सेवा को असली समाज सेवा का फ़र्ज़ी सर्टिफ़िकेट दे दिया।वंहा मैं चाह कर भी अपने दिल की भडास नही निकाल पाया क्योंकि वंहा मौजूद अधिकांश समाजसेवी मेरे मित्र थे।
उसके बाद प्रेस क्लब मे बच्चों के लिये चित्रकला स्पर्धा मे भी लगभग यही हालत रही मेरी।वंहा से मैं स्व गुलाब भाई दवे के चित्र पर माला अर्पित कर व दीप प्रज्ज्वलित कर खिसक लिया और वंहा से खादी ग्रामोद्योग व ग्राम सेवा समिति के कार्यक्रम मे बाल आश्रम पंहुचा।रोज़-रोज़ कुर्ता-पायजामा पहने कर सादगी का ढिंढोरा पीटने वाला मैं पता नही कैसे आज शर्ट-पैंट पहन कर कार्यक्रम मे पहुंच गया था।
बाल-आश्रम के बच्चों के सामने मुझसे झूट बोला नही गया,मगर फ़िर भी मैं सच बोलने की हिम्मत भी नही कर सका।वंहा भी मैने ये कह कर बला टाल दी कि अभी मैं बापू पर कुछ भी बोलने लायक नही हूं लेकिन जब भी मैं बापू पर बोलने लायक होऊंगा तब ज़रूर बोलूंगा।पता नही बापू आप पर मैं कभी कुछ बोल पाऊंगा भी या नही?मगर एक बात समझ में नही आई बापू झूठ बोलना पाप है,ज़रूरत से ज्यादा जमा करना पाप है इन बातो का सरासर मज़ाक उड़ाने वाले कैसे आपके मामले मे सरासर झूट बोल जाते है?बापू चाहे कोई कुछ भी कहे मुझसे तो आपके माम्ले में झूट भी नही बोला जाता,सच बोलना तो और दूर की बात है।
सारी बापू पिछले साल मैंने सोचा था कि झूट नही बोलूंगा,सच बोलूंगा मगर दो अक्टूबर को आपके बड्डे पर लोगों द्वारा दिलाये गये संकल्प शायद तीन तारीख आते आते चूर चूर हो जाते हैं।हो सकता है किसी और के साथ नही होता हो पर मेरे साथ तो होता आया है और शायद बापू के अगले बड्डे पर भी मैं सच ना बोल पाऊं।सारी बापू इस बार मैं सच बोल रहा हूं।हो सके तो मुझे माफ़ कर देना।आपको भी यदी लगे सच बोलना आसान है तो मुझे बताईगे ज़रूर।
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Sunday, October 3, 2010
Sunday, October 4, 2009
अरे बापू आप?हां बेटा मैं!बहुत परेशान हो गया हूं,सोचा तू ही कुछ करे पायेगा इसलिये…………
रात्रिकालीन सत्संग थोड़ा लम्बा हो गया था।बापू को लेकर डिस्कशन मे हाट टाक से लेकर हाथापाई तक़ की नौबत आ गई थी।किसी तरह मामला सुल्झा कर घर पंहुचा और लम्बी तान कर झंझटो से मुक्ति की टेम्पररी खुराक खा ली।नींद का मीठा झोंका सपनों की दुनिया में धकेल ही रहा था कि कमरा दूधिया रौशनी से जगमगाने लगा।मुझे लगा कि कंही भ्रष्टराष्ट्र तो फ़िर से नही आ टपका।इधर उधर देखा तो कोने मे बापू को खड़ा देखा।मै चौंक गया।पहले अपने को चिमट कर देखा,फ़िर आंखे मलने लगा तो बापू हंसे और बोला अरे मै ही हूं मोहन दास करम चंद गांधी।मैने कहा बापू!तो बापू ने गहरी सांस ली और कहा कि काहे का बापू!बस मोहनदास करमचंद गांधी।
मैने देखा बापू परेशान लग रहे थे।मैने तत्काल बिस्तर छोड़ा और सीधे उनके चरणो पर लेट गया।बापू ने आशीर्वाद देना छोड़ अपने पैर पीछे खींच लिये।मैने लेटे लेटे ही गरदन उठा कर उनसे पूछा,बापू कोई गलती हो गई मुझसे?उन्होने मुझसे पूछा कंहा से घर आया है वापस?वो बापू दोस्तो के साथ……… वो पार्टी थी ना… अच्छा,रोज़ पार्टी रहती है।जी नही बापू।तो फ़िर कल कंहा था।बापू कल भी पार्टी थी।किसकी मेरे जन्म दिन की।हां बापू……वो क्या है कि…दिन-दहाड़े,बापू ने सवाल किया।अब मेरे पास खामोश होने के अलावा कोई और बहाना नही था।मेरी चुप्पी तोड़ी बापू ने।उन्होने कहा कि उस दिन जब तो मेरी जयंती पर सब कुछ सच-सच बोलने लगा तो मुझे लगा कि तू अच्छा लड़का है,इसिलिये मै यंहा आया लेकिन्……………।बापू खामोश हो गये।मैने पुछा लेकिन क्या बापू?बापू ने कहा कि तूझमे और बाकी लोगो मे बहुत ज्यादा फ़र्क़ नही है।मैने कहा ऐसा नही बापू।सच मे मै आपको बहुत प्यार करता हूं।कोई आपके खिलाफ़ एक शब्द भी कहता है तो ऐसा लगता है कि साले का खून पी जाऊं।वाह।क्या अंदाज़ है प्यार करने का?यही सिखाया था मैने कि कोई विरोध करे तो उसका खून पी जाओ?अरे बापू!आप भी ना।ये तो फ़ार्मल डायलाग है,ठीक वैसे ही जैसे आतंकवदियों के हमलो के बाद नेता बोलते हैं।तो तू कौन सा नेता से कम है?क्या बापू आप मुझे गाली दे रहे हैं।और तू,तू क्या कर रहा था ……क्या कहता है उसे पार्टी………और तू तो उसे सत्संग भी कहता है ना।सारी बापू कल से नही बोलूंगा।बोल,बोल सत्संग बोल,प्रवचन बोल जो चाहे बोल्।तो तू क्या प्रवचन दे रहा था सत्संग मे।वो बापू……… क्या?वो साला कालू आपके बारे मे अंट-शंट बक़ रहा था,मुझसे बर्दाश्त नही हुआ…तो इसका मतलब है उसे गालियां बकेगा,मारपीट पर उतर आयेगा।बहुत प्यार करता है ना मुझसे?ये भी कोई पूछने की बात है बापू।तो फ़िर अहिंसा का नाम नही सुना क्या?सुना है बापू लेकिन वो साला अहिंसा से मानने वाला नही था इस्लिये गाली बक़ना पड़ गया।
अब तू ही बता ऐसे मे तूझे मेरे चरण स्पर्श करने का हक़ है क्या?क्यों?क्या बापू अभी परसों की ही बात है।आपकी जयंती पर देश के कोने-कोने मे एक से एक कमीनो ने आपके चरण स्पर्श किये तो आपने उनको मना नही किया।वे मेरे क्या लगते हैं जो उन्हे मना करता?क्या बात करते है बापू।आधे से ज्यादा तो खादी पहनने वाले थे और आपकी ही पार्टी के लोग थे,कुछ आपको निपटाने का आरोप झेलने वाली पार्टी के लोग थे।कुछ जगह तो बड़े-बड़े जमाखोरों,सूदखोरों,सटोरियो और हत्यारों तक़ ने आपके चरण स्पर्श किये।आपको माला पहनाई तब आप क्यों खामोश रहे?ये बता उनमे से एक के भी पास गया क्या मैं?ये बात तो है बापू,मगर जब आप मेरे पास आये हो तो मुझे चरण स्पर्श करने दो और आशीर्वाद भी।ठीक है लेकिन एक शर्त है?क्या?तुझे सच बोलना पड़ेगा,हमेशा।बोल मंज़ूर?अरे मरवाओगे बापू?क्यों नही बोलना है?वो बात नही है बापू सच बोलने से नुकसान बहुत है?कितना ?क्या जान से भी ज्यादा?मै समझ गया बापू क्या कहना चाह रहे थे।मै खामोश ही रहा।तो बापू ने कहा ठीक है फ़िर मै चलता हूं।मैने कहा नही बापू ऐसा मत किजिये।बापू,बोले अरे तू तो सच बोलने मे डर रहा है।मै कैसे मान लूं कि तू मुझसे प्यार करता है।बापू कह तो रहा हूं।कोई भरोसा है तेरा?हो सकता है तू झूठ बोल रहा हो।बापू आप मेरी इंसल्ट कर रहे हैं।बापू ने खूब ज़ोर का ठहाका लगाया और कहा कि लगता है अंग्रेज़ अभी तक़ गये नही है।
मै सन्न था।सच मे बापू के चरण स्पर्श के लायक नही था मै।क्या सोच रहा है?अभी भी डर रहा है सच बोलने से तो मुझे साफ़-साफ़ बता दे मै किसी और से बात कर लूंगा।नही-नही बापू मैं सच बोलूंगा?सिर्फ़ सच बोलूंगा।ठीक है तो तू मुझे देश का हाल बता और हां एक बात याद रखना तूझे सिर्फ़ सच ही बोलना है।बापू आपको तो सब पता ही है……………नही पता है इसलिये तो तूझसे पूछ रहा हूं।क्या बात कर रहे हो बापू,आपको कैसे पता नही होगा?आप देश के बापू हैं?देख मुझे जो पता है वो आधा-अधूरा है और वो भी मेरे अनुयायियों का बताया हुआ है।पता नही उसमे कितना सच है और कितना पार्टी का एजेण्डा।बापू आपको जित्ता पता है उत्ता ही ठीक है।क्या करोगे ज्यादा जानकर?तुझे इससे क्या?तुझे बताना है या नही ये बता?बापू आपने शर्त भी तो रख दी है सच बोलने की।वो तो है।बस इसिलिये तो डर रहा हूं बापू।सच कहने मे मेरी हालत खराब हो रही तो सोचो आपको कितना दुःख होगा।मैने तो देश के लिये कुछ किया भी नही है तो इसकी हालत देख के रोना आता है,फ़िर आपने तो इसे आज़ाद कराने के लिये क्या नही किया?आप नही सुन पाओगे बापू?मै नही सुन पाऊंगा या तू सुना नही पायेगा?एक ही बात है बापू?कोई और टापिक नही है क्या आपके पास?देख मै तुझसे देश की जानकारी लेनेआया हूं।समझा।ठीक है बापू जैसी आपकी मरज़ी।दुःख होगा तो मुझे दोष मत देना।ठीक है सुना………। और फ़िर मेरे और बापू के बीच देश के बारे मे लम्बी चर्चा हुई।क्या चर्चा हुई सुनाऊंगा कल्।
मैने देखा बापू परेशान लग रहे थे।मैने तत्काल बिस्तर छोड़ा और सीधे उनके चरणो पर लेट गया।बापू ने आशीर्वाद देना छोड़ अपने पैर पीछे खींच लिये।मैने लेटे लेटे ही गरदन उठा कर उनसे पूछा,बापू कोई गलती हो गई मुझसे?उन्होने मुझसे पूछा कंहा से घर आया है वापस?वो बापू दोस्तो के साथ……… वो पार्टी थी ना… अच्छा,रोज़ पार्टी रहती है।जी नही बापू।तो फ़िर कल कंहा था।बापू कल भी पार्टी थी।किसकी मेरे जन्म दिन की।हां बापू……वो क्या है कि…दिन-दहाड़े,बापू ने सवाल किया।अब मेरे पास खामोश होने के अलावा कोई और बहाना नही था।मेरी चुप्पी तोड़ी बापू ने।उन्होने कहा कि उस दिन जब तो मेरी जयंती पर सब कुछ सच-सच बोलने लगा तो मुझे लगा कि तू अच्छा लड़का है,इसिलिये मै यंहा आया लेकिन्……………।बापू खामोश हो गये।मैने पुछा लेकिन क्या बापू?बापू ने कहा कि तूझमे और बाकी लोगो मे बहुत ज्यादा फ़र्क़ नही है।मैने कहा ऐसा नही बापू।सच मे मै आपको बहुत प्यार करता हूं।कोई आपके खिलाफ़ एक शब्द भी कहता है तो ऐसा लगता है कि साले का खून पी जाऊं।वाह।क्या अंदाज़ है प्यार करने का?यही सिखाया था मैने कि कोई विरोध करे तो उसका खून पी जाओ?अरे बापू!आप भी ना।ये तो फ़ार्मल डायलाग है,ठीक वैसे ही जैसे आतंकवदियों के हमलो के बाद नेता बोलते हैं।तो तू कौन सा नेता से कम है?क्या बापू आप मुझे गाली दे रहे हैं।और तू,तू क्या कर रहा था ……क्या कहता है उसे पार्टी………और तू तो उसे सत्संग भी कहता है ना।सारी बापू कल से नही बोलूंगा।बोल,बोल सत्संग बोल,प्रवचन बोल जो चाहे बोल्।तो तू क्या प्रवचन दे रहा था सत्संग मे।वो बापू……… क्या?वो साला कालू आपके बारे मे अंट-शंट बक़ रहा था,मुझसे बर्दाश्त नही हुआ…तो इसका मतलब है उसे गालियां बकेगा,मारपीट पर उतर आयेगा।बहुत प्यार करता है ना मुझसे?ये भी कोई पूछने की बात है बापू।तो फ़िर अहिंसा का नाम नही सुना क्या?सुना है बापू लेकिन वो साला अहिंसा से मानने वाला नही था इस्लिये गाली बक़ना पड़ गया।
अब तू ही बता ऐसे मे तूझे मेरे चरण स्पर्श करने का हक़ है क्या?क्यों?क्या बापू अभी परसों की ही बात है।आपकी जयंती पर देश के कोने-कोने मे एक से एक कमीनो ने आपके चरण स्पर्श किये तो आपने उनको मना नही किया।वे मेरे क्या लगते हैं जो उन्हे मना करता?क्या बात करते है बापू।आधे से ज्यादा तो खादी पहनने वाले थे और आपकी ही पार्टी के लोग थे,कुछ आपको निपटाने का आरोप झेलने वाली पार्टी के लोग थे।कुछ जगह तो बड़े-बड़े जमाखोरों,सूदखोरों,सटोरियो और हत्यारों तक़ ने आपके चरण स्पर्श किये।आपको माला पहनाई तब आप क्यों खामोश रहे?ये बता उनमे से एक के भी पास गया क्या मैं?ये बात तो है बापू,मगर जब आप मेरे पास आये हो तो मुझे चरण स्पर्श करने दो और आशीर्वाद भी।ठीक है लेकिन एक शर्त है?क्या?तुझे सच बोलना पड़ेगा,हमेशा।बोल मंज़ूर?अरे मरवाओगे बापू?क्यों नही बोलना है?वो बात नही है बापू सच बोलने से नुकसान बहुत है?कितना ?क्या जान से भी ज्यादा?मै समझ गया बापू क्या कहना चाह रहे थे।मै खामोश ही रहा।तो बापू ने कहा ठीक है फ़िर मै चलता हूं।मैने कहा नही बापू ऐसा मत किजिये।बापू,बोले अरे तू तो सच बोलने मे डर रहा है।मै कैसे मान लूं कि तू मुझसे प्यार करता है।बापू कह तो रहा हूं।कोई भरोसा है तेरा?हो सकता है तू झूठ बोल रहा हो।बापू आप मेरी इंसल्ट कर रहे हैं।बापू ने खूब ज़ोर का ठहाका लगाया और कहा कि लगता है अंग्रेज़ अभी तक़ गये नही है।
मै सन्न था।सच मे बापू के चरण स्पर्श के लायक नही था मै।क्या सोच रहा है?अभी भी डर रहा है सच बोलने से तो मुझे साफ़-साफ़ बता दे मै किसी और से बात कर लूंगा।नही-नही बापू मैं सच बोलूंगा?सिर्फ़ सच बोलूंगा।ठीक है तो तू मुझे देश का हाल बता और हां एक बात याद रखना तूझे सिर्फ़ सच ही बोलना है।बापू आपको तो सब पता ही है……………नही पता है इसलिये तो तूझसे पूछ रहा हूं।क्या बात कर रहे हो बापू,आपको कैसे पता नही होगा?आप देश के बापू हैं?देख मुझे जो पता है वो आधा-अधूरा है और वो भी मेरे अनुयायियों का बताया हुआ है।पता नही उसमे कितना सच है और कितना पार्टी का एजेण्डा।बापू आपको जित्ता पता है उत्ता ही ठीक है।क्या करोगे ज्यादा जानकर?तुझे इससे क्या?तुझे बताना है या नही ये बता?बापू आपने शर्त भी तो रख दी है सच बोलने की।वो तो है।बस इसिलिये तो डर रहा हूं बापू।सच कहने मे मेरी हालत खराब हो रही तो सोचो आपको कितना दुःख होगा।मैने तो देश के लिये कुछ किया भी नही है तो इसकी हालत देख के रोना आता है,फ़िर आपने तो इसे आज़ाद कराने के लिये क्या नही किया?आप नही सुन पाओगे बापू?मै नही सुन पाऊंगा या तू सुना नही पायेगा?एक ही बात है बापू?कोई और टापिक नही है क्या आपके पास?देख मै तुझसे देश की जानकारी लेनेआया हूं।समझा।ठीक है बापू जैसी आपकी मरज़ी।दुःख होगा तो मुझे दोष मत देना।ठीक है सुना………। और फ़िर मेरे और बापू के बीच देश के बारे मे लम्बी चर्चा हुई।क्या चर्चा हुई सुनाऊंगा कल्।
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