Showing posts with label prince. Show all posts
Showing posts with label prince. Show all posts

Thursday, September 29, 2011

बचपन की कहानियों में राक्षस की जान मिट्ठू में होती थी वैसे ही कांग्रेस की जान लगता है कि चिदम्बरम में है!

बचपन में अधिकांश कहानियों मे राक्षस हुआ करते थे.और राक्षस को मारने राजकुमार भी होते थे.राक्षस और राजकुमार में जब फायनल फाइट होती थी तो सब राक्षस की ताक़त से हैरान रह जाते थे.एक से एक तीर-तलवार के वार,गदा से गदागद और फिर भी राक्षस का बाल भी बांका नही होता था.राजकुमार भी पसीने-पसीने,हैरान-परेशान.फिर कोई धीरे से राजकुमार के कान में फुसफुसाता और राजकुमार राक्षस को छोड कर बगल के पेड पर लटके पिंजरे के मिट्ठू की गरदन मरोडता और उधर राक्षस टें बोल देता.मेरे खयाल से चिदम्बरम ही वो मिट्ठू है इसिलिये उसे बचाने में कांग्रेस पूरी ताक़त लगा रही है.