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Thursday, September 29, 2011

बचपन की कहानियों में राक्षस की जान मिट्ठू में होती थी वैसे ही कांग्रेस की जान लगता है कि चिदम्बरम में है!

बचपन में अधिकांश कहानियों मे राक्षस हुआ करते थे.और राक्षस को मारने राजकुमार भी होते थे.राक्षस और राजकुमार में जब फायनल फाइट होती थी तो सब राक्षस की ताक़त से हैरान रह जाते थे.एक से एक तीर-तलवार के वार,गदा से गदागद और फिर भी राक्षस का बाल भी बांका नही होता था.राजकुमार भी पसीने-पसीने,हैरान-परेशान.फिर कोई धीरे से राजकुमार के कान में फुसफुसाता और राजकुमार राक्षस को छोड कर बगल के पेड पर लटके पिंजरे के मिट्ठू की गरदन मरोडता और उधर राक्षस टें बोल देता.मेरे खयाल से चिदम्बरम ही वो मिट्ठू है इसिलिये उसे बचाने में कांग्रेस पूरी ताक़त लगा रही है.

Friday, November 13, 2009

पता है ये फ़यान मुम्बई क्यों नही आया?

एक माईक्रोपोस्ट पेश है।रात्रिकालीन सत्संग़ मे कल अचानक़ राजकुमार ने सवाल किया कि पता है फ़यान मुम्बई क्यों नही आया?अब इस सवाल का जवाब तो किसी के पास था ही नही तो उसे जवाब क्या देते?मैने कहा जाने दे यार दिमाग मत खा ये फ़यान का पर्सनल मामला है वो जाने उसका काम।गोपाल बोला हो सकता है उसे दुबाई जाने का खयाल आ गया हो और वो उधर निकल गया हो।डाक्टर भी आड़े तिरछे सवाल से खासा नाराज़ नज़र आया।उसने भी राजकुमार की खिंचाई की और कहा सवाल तो ऐसे कर रहा है जैसे फ़यान से इंटरव्यूह लेकर आ रहा है।अब सब राजकुमार पर भड़क गये तेरा येई लफ़ड़ा रहता है।जब देखो अंट शंट बात करता है।वो भी उख़ड़ गया और बोला जब तुम लोग मेरे से सवाल करते हो तब?मैं बोला चल तू जीता हम लोगों को नही पता फ़यान मुम्बई क्यों नही आया?अब तू ही बता दे भैया कि वो मुम्बई क्यों नही आया?सिंपल सा जवाब है,पता नही तुम लोग कैसे नही समझ पाये?बड़े इंटलैक्चुअल बने फ़िरते हो।हम लोग बोले अबे होशियारी मत दिखा जवाब दे।तो वो हंस कर बोला भाई फ़यान को मराठी नही आती है ना इसलिये वो वापस चला गया।उसको अबू आज़मी वाला लफ़ड़ा पता चल गया था।इतना सुनते ही सबका दिमाग खराब हो गया और सबके मुंह से एक साथ निकला साले!और तब तक़ राजकुमार की हंसी रफ़्तार पकड़ चुकी थी।हम लोगो के पास भी सिवाय खिसियानी हंसी हंसने के कोई चारा नही था।दोस्तों के बीच फ़ुरसत के पलो को हंसी-मज़ाक मे जीने के दौरानछुई ये हल्कि-फ़ुल्की चर्चा है।इसका मुम्बई विवाद या मनसे से कोई लेना-देना नही है और कोई भी विद्वान इसे मुझसे जोड़कर ना देखें।राजकुमार एक पीने से लेकर खाने मे पूरे ग्रूप मे एक नम्बर है और उसे गंभीर विषय सख्त नापसंद है।उसका कहना है कि बड़ी मुश्किल से मनुष्य योनी मिली है,इसका पूरा-पूरा उपभोग किया जाना चाहिये पता नही अगले जनम मे कीड़े बनते हैं या मकौड़े?इसी मानसिकता के तहत उसका सवाल था।