इस ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया, कृपया कमेण्ट्स कर मुझे मेरी गलतियां सुधारने का मौका दें

Wednesday, June 9, 2010

रक्तदान की इच्छा हो तो……………………………………

एक छोटी सी पोस्ट बहुत कुछ कहती हुई।सुबह-सुबह एक एसएमएस मिला अंजान नम्बर से।सीधे डीलिट कर रहा था कि उस छोटे से एसएमएस को पढे बिना रहा नही गया।एसएमएस भी बहुत ही छोटा सा था।
अगर आपको रक्तदान की इच्छा हो तो,
यंहा सड़क पर मत करिये,
कृपया ब्लड बैंक मे करिये।

रोज़ सड़क हादसों की खबरों से अख़बार अटे पडे रहते हैं,रोज़ हाईवे पर खून बहने की बात सामने आती है,ऐसे मे इस एसएमएस ने बहुत कुछ सोचने पर मज़बूर कर दिया।इसे मैने डीलिट करने की बजाय फ़ारवर्ड करना शुरू किया और अब इसे आप लोगो से बांट रहा हूं।सड़को पर जितना खून हादसों मे बह जाता है उससे बहुत की जान बचाई जा सकती है।बस ज़रुरत है रफ़्तार की दिवानगी पर ब्रेक लगाने की।

29 comments:

रंजन said...

सही है..

संगीता पुरी said...

बिल्‍कुल सही !!

arvind said...

bilkul sahi likha hai aapne. bas thde se dhairya ki jarurat hai ki kam raftar se vehicle chalaaye. yeh soche ki tej chalana hamaari bahaaduri nahi balki accelerator kaa kamaal hai..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

जितने लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं उतने तो बीमारियों से भी नहीं मरते..

varun jha said...

एक छोटी सी पोस्ट बहुत कुछ कहती हुई।

संजय बेंगाणी said...

bahut sahi farmaya

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

इसीलिये मै ब्लड बैंक मे ही जाता हूं

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

इसीलिये मै ब्लड बैंक मे ही जाता हूं

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

इसीलिये मै ब्लड बैंक मे ही जाता हूं

Darshan Lal Baweja said...

बिलकुल सही जी !!!

Sanjeet Tripathi said...

chhattisgarh me sadak hadso ki sankhya me baadh si aa gai hai, har roj 3-4 ghatnayein.

sadko ka haal sudharne aur 2 lane, 4 lane sadkein badhne ke baad hi aisa ho raha hai. log gati par se niyantran jyada kho rahe hain.

Aashu said...

एक बड़ी छोटी सी बात सोचने की है। आपके आसपास अपने बचपन से कितने लोगों को आपने सिगरेट पीते देखा है? कहते हैं की तम्बाकू का सेवन करने से फेफड़े का कैंसर हो जाता है मगर अपनी ज़िन्दगी में कितनों को सिगरेट पीकर कैंसर से मरते देखा है? जिन्हें देखा है उनमे से युवा पीढ़ी के कितने थे? अब ये सोचिये कि जवानी के जोश में फुल स्पीड में मोटरसाइकल चलाते हुए एक्सिडेंट की घटनाएँ और उससे युवाओं की मौत का कितना उदहारण आप दे सकते हैं। बस सोचिये और फिर ये भी सोचिये कि तम्बाकू उन्मूलन कार्यक्रम के लिए हम और सर्कार दोनों परेशां हैं मगर रोड एक्सिडेंट की तरफ किसी का ध्यान क्यूँ नहीं जाता?

जी.के. अवधिया said...

"बस ज़रुरत है रफ़्तार की दिवानगी पर ब्रेक लगाने की।"

कह तो आप सही रहे हैं किन्तु देखने में तो यही आता है कि ब्रेक लगने के स्थान पर दीवानगी दिनों दिन बढ़ते ही जा रही है।

सतीश सक्सेना said...

कई बार कम शब्दों में पूरे लेख की बात हो जाती है अनिल भाई !

सतीश सक्सेना said...

कई बार कम शब्दों में पूरे लेख की बात हो जाती है अनिल भाई !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

एकदम सही बात!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

एस एम एस छोटा ज़रूर है पर विचार बहुत बड़ा है.

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर संदेश

डॉ टी एस दराल said...

रक्तदान स्वैच्छिक होता है , लेकिन सड़क पर नहीं ।
अच्छा सन्देश ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक....विचारणीय पोस्ट

डॉ महेश सिन्हा said...

speed thrills but it kills

ali said...

सही एसएमएस !

ajit gupta said...

जिस किसी ने भी यह संदेश लिखा है वह बहुत ही प्रतिभाशाली है उस अज्ञात व्‍यक्तित्‍व को नमन।

RAJESH BISSA said...

यह संदेश हर स्तर पर कारगर है अच्छी मुहीम चलाई है आपने अनिल भैय्या ॰॰॰॰॰

मैं तो बस इतना कहना चाहुंगा ॰॰॰॰॰॰॰॰

देश के लिये रक्त नहीं बहा सके, तो क्या
देश वासियों को ही दे दो रक्त की कुछ बूंद
यूं बिखेर राहों में रक्त कुछ ना मिलेगा
जो सुकून तुझे रक्तदान कर के मिलेगा
सांसे दे सकती है रक्तदान की दो बूंदे
इससे तेरे रक्त का, मोल तो मिलेगा

राजेश बिस्सा

P.N. Subramanian said...

यह बहुत कुछ कह गयी

खुशदीप सहगल said...

अनिल भाई,

रक्तदान से बड़ा दान और कोई नहीं है...

पहले अमर उजाला में था तो वहां हर साल रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता था...सारा स्टॉफ रक्त देता था...ऐसे शिविर हर संस्थान में लगने चाहिए...होता ये है कि व्यस्तता की वजह से हम चाह कर भी खुद से ब्लड बैंक जाकर रक्तदान नहीं कर पाते...अगर ऑफिस में ही छह महीने-साल में ऐसी व्यवस्था हो जाए तो किसी को भी रक्त देने में खुशी होगी...

जय हिंद...

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

छात्र जीवन में मैं नियमित सालाना ब्लड डोनर हुआ करता था। कालान्तर में डक्टर मना करने लगे। अब भी पांच साल में एक बार डोनेशन हो जाता है।
आपने अच्छे विषय पर ध्यान दिलाया अनिल जी।

Voice Of The People said...

अगर आपको रक्तदान की इच्छा हो तो,
यंहा सड़क पर मत करिये,
कृपया ब्लड बैंक मे करिये।
बहुत अच्छा पैग़ाम है लेकिन भाई सड़कों पे खून बहने से बहुतों के पेट भरते हैं और आज पैसा ही धर्म है, ईमान है. जब तक इंसानियत नहीं होगी , सड़कों पे खून बहता रहेगा

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर एस.एम.एस. बढ़िया पोस्ट! जय हो।