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Friday, August 14, 2015

बापू के बंदर बोलते थे,ये अब पता चला,थैंक यू पप्पू

आज़ादी का जश्न मनाने की तैयारी करते वक़्त मुझे लगा की मुझे तो झण्डा फ़हराने का हक़ ही नही है।छी कितना अग्यानी,कितना अंजान,कितना नादान हूं मैं।मुझे आज तक ये भी नही पता था कि बापू के पास तीन छोटे छोटे छोटे-छोटे बंदर थे।एक कहता था कि बुरा मत बोलो,एक कहता था कि बुरा मत सुनो और एक कहता था कि बुरा मत देखो।बचपन से लेकर अब तक़ जितनी गुरुजी लोगों ने पढाया सबको मन ही मन गालियां देन की इच्छा ज़ोर मार रही है।और तो और वो रिचर्ड एडिनबरो को जी भर कर गालियां देन की इच्छा हो रही है।उसकी फ़िलम देख कर बापू के बारे में दुनिया भर में शेखी मारते थे हम।आज पता चल रहा है कि शेखचिल्ली से ज्यादा नालेज नही था हमारे पास,बापू के बारे में तो हम ज़िरो थे।जिसने हमे आज़ादी दिलाई उसके पास तीन छोटे-छोटे,छोटे-छोटे,छोटे-छोटे बंदर थे,ये हमको पता ही नही था।छी धिक्कार है हम पर।स्युसाईड करने की भी इच्छा दम मारने लगी थी पर बेशर्मी में भी किसी पालिटिकल लीडर से कम नही थे सो उस आईडिया को ड्राप कर सोचने लगे कि आखिर ये बापू के पास तीन छोटे छोटे बोलने वाले बंदर होने की बात हमे पता कैसे नही चली?सारे दोस्तों से पूछा तो सब हंस दिये,उन्होने सिर्फ़ इतना कहा कि पगला गया है क्या बे?घर में भाई/बहनों से पूछा,अडोसी/पडोसी से पूछा,रिटायर हो चुके गुरुजनो से पूछा,बापू को पेटेंट करा चुकी पार्टी के छोटे-बडे तुर्र्मखान टाईप के सेल्फ़ मेड लीडरो से पूछा,वे भी हंस कर चुप रह गये।बहुत सोचा पर जब जवाब नही मिला तो हमने मन ही मन देश के सबसे युवा,सबसे ग्यानी,सबसे उर्जावान,सबसे देशभक़्त,सबसे जूझारू और सबसे ज्यादा खोजी व बापू के बारे में नालेज रखने वाले देश के भावी प्रधानमंत्री जी को मन ही मन धन्यवाद दिया कि उन्होने आज आज़ादी के इतने सालो बाद हमारी आंखे खोल दी।हम को आज तक नही पता था कि बापू के पास बोलने वाले तीन छोटे छोटे बंदर थे।धन्य हो युवराज जी,आप महान है,आप अगर अंग्रेज़ी में लिखी हिंदी पढते है तो लोग मज़ाक उडाते है,पर मैं समझ रहा हूं आप अंग्रेज़ो से बदला ले रहे है।मान गये आप को।धन्य हो।मुझे खुद पर शर्म और आप पर गर्व मह्सूस हो रहा है।अब मैं शान से बापू के तीन बोलने वाले बंदरो की कहानी सुनाऊंगा।जै हो युवराज की।देश की तरुणाई की,देश के थिंक टैंक की।

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